
Nag Panchami 2026: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए खास माना जाता है और इसी दौरान नाग पंचमी का पर्व भी आता है। इस बार 17 अगस्त, सोमवार को नाग पंचमी पड़ रही है। खास बात यह है कि इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार भी है। ऐसे में शिव पूजा के साथ नाग देवता की आराधना को लेकर लोगों में खास उत्साह है। लेकिन नाग पंचमी से जुड़ा एक सवाल हर साल चर्चा में रहता है, क्या इस दिन असली सांप या नाग की पूजा करनी चाहिए?
धार्मिक परंपरा में नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा का भाव प्रमुख है, न कि जीवित सांप को पकड़कर उसकी पूजा करना। इसलिए घर पर नाग देवता की तस्वीर, प्रतिमा या मिट्टी से बनी आकृति स्थापित कर पूजा की जा सकती है। कई परिवारों में घर के बाहर गोबर से नाग की आकृति बनाने और उसकी पूजा करने की भी परंपरा है। यानी आस्था निभाने के लिए किसी जीवित नाग को पकड़ना या उसके आसपास भीड़ लगाना जरूरी नहीं है। प्रतीकात्मक पूजा से ही पर्व की धार्मिक भावना पूरी की जा सकती है।
नाग पंचमी पर सांपों को दूध पिलाने की परंपरा कई जगह देखने को मिलती है, लेकिन इसे सही नहीं माना जाता। सांप दूध पीने वाले प्राकृतिक जीव नहीं हैं और जबरन दूध पिलाने की कोशिश उनके लिए नुकसानदेह हो सकती है। इसके अलावा जीवित सांप के साथ भीड़ जुटाना उसके लिए तनाव और लोगों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करें, लेकिन किसी जीवित सांप को पकड़कर दूध पिलाने या परेशान करने से बचें।
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नाग पंचमी के दिन भूमि की खुदाई से बचने की परंपरा के पीछे धार्मिक मान्यता के साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं से जुड़ा पहलू भी बताया जाता है। सावन में बारिश के कारण सांप और दूसरे जीव सुरक्षित जगहों या बिलों में रह सकते हैं। ऐसे समय जमीन खोदने से उनके आश्रय को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसी वजह से इस दिन हल चलाने, खेत खोदने या बेवजह मिट्टी खोदने से परहेज करने की परंपरा चली आ रही है। इसे नाग देवता के प्रति सम्मान और जीव-जंतुओं के संरक्षण से जोड़कर देखा जाता है।
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इस वर्ष पंचमी तिथि 16 अगस्त शाम 4:52 बजे शुरू होकर 17 अगस्त शाम 5 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी। पूजा का शुभ समय सुबह 5:51 बजे से 8:29 बजे तक बताया गया है। हालांकि कि उदया तिथि के कारण पूरे दिन नागपंचमी की पूजा की जा सकती है। नाग पंचमी का सबसे सार्थक संदेश यही है कि श्रद्धा के साथ पूजा करें, लेकिन जीवित नाग को पकड़ने, दूध पिलाने या परेशान करने के बजाय प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति करुणा रखें।
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