
Nag Panchami 2026 Details: श्रावण यानी सावन, भगवान शिव का प्रिय महीना है। इस महीने में कईं प्रमुख व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें नाग पंचमी भी एक है। ये पर्व हर साल श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार ये उत्सव 17 अगस्त, सोमवार को रहेगा। श्रावण सोमवार को नागपंचमी होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। नाग पंचमी के मौके पर नागदेवता की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि ऐसा करने से नागदेवता की कृपा बनी रहती है। आगे जानें नागपंचमी पर कैसे करें नागदेवता की पूजा, कौन-सा मंत्र बोलें, शुभ मुहूर्त आदि पूरी डिटेल…
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ज्योतिषाचार्य पं. नलिन शर्मा के अनुसार, नाग पंचमी पर पूजा के कई शुभ मुहूर्त रहेंगे, लेकिन सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 51 मिनिट से 08 बजकर 29 मिनिट तक रहेगा। इसके अलावा दिन भर के अन्य मुहूर्त इस प्रकार हैं-
- सुबह 06:07 से 07:43 तक
- सुबह 09:19 से 10:55 तक
- दोपहर 12:05 से 12:56 तक (अभिजीत मुहूर्त)
- दोपहर 02:06 से 03:42 तक
- शाम 05:18 से 06:54 तक
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- नाग पंचमी की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की तैयारी कर लें। घर में किसी स्थान पर लकड़ी का बाजोट रख इस पर नागदेवता की प्रतिमा स्थापित करें।
- नाग देवता की प्रतिमा पर कुमकुम से तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक लगाकर ये मंत्र बोलें-
अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपाल धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रात:काले विशेषत:।।
तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्।।
- नागदेवता की प्रतिमा का गाय के दूध से अभिषेक करें, इसके बाद शुद्ध जल से। गंध, रोली, अबीर, गुलाल, चावल, फूल चढ़ाएं।
- इसके बाद मिठाई, दूध, फल आदि चीजों का भोग लगाएं। इस तरह पूजा करने के बाद नागदेवता की परिवार सहित आरती करें।
- नाग पंचमी पर इस विधि से यदि नाग देवता की पूजा की जाए तो सर्प भय नहीं रहता और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
आरती कीजे श्री नाग देवता की,
भूमि का भार वहनकर्ता की।
उग्र रूप है तुम्हारा देवा,
भक्त सभी करते हैं सेवा।
मनोकामना पूर्ण करते,
तन-मन से जो सेवा करते।
आरती कीजे श्री नाग देवता की,
भूमि का भार वहनकर्ता की।
भक्तों के संकट हारी की,
आरती कीजे श्री नाग देवता की।
आरती कीजे श्री नाग देवता की,
भूमि का भार वहनकर्ता की।
महादेव के गले की शोभा,
ग्राम देवता में है पूजा।
श्वेत वर्ण है तुम्हारी ध्वजा,
दास ऊंकार पर रहती कृपा।
सहस्रफनधारी की,
आरती कीजे श्री नाग देवता की।
आरती कीजे श्री नाग देवता की,
भूमि का भार वहनकर्ता की।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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