Narmada Jayanti 2026: किसकी पुत्री हैं नर्मदा, क्यों इसे कहते कुंवारी नदी?

Published : Jan 24, 2026, 10:44 AM IST

Narmada Jayanti 2026: हर साल माघ मास में नर्मदा जयंती का पर्व मनाया जाता है। नर्मदा मध्य प्रदेश की एक विशाल नदी है, जिसका वर्णन धर्म ग्रंथों में भी मिलता है। हर साल नर्मदा जयंती के मौके पर नर्मदा नदी के तटों पर विशाल धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।

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नर्मदा जयंती 2026

Narmada Jayanti 2026 Date: हमारे देश में अनेक नदियां हैं, नर्मदा भी इनमें से एक है। हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को नर्मदा जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 25 जनवरी, रविवार को मनाया जाएगा। नर्मदा नदी कितनी प्राचीन है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका वर्णन रामायण आदि ग्रंथों में भी मिलता है। नर्मदा नदी किसकी पुत्री हैं और ये धरती पर क्यों आईं, जानिए रोचक बातें…

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किसकी पुत्री हैं नर्मदा नदी?

स्कंद पुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव तपस्या में लीन थे। तपस्या इतनी तीव्र थी कि उनके शरीर से पसीने की बूंदें टपकने लगी। इन्हीं पसीनों की बूंदों से एक कुंड का निर्माण हुआ, जिसने एक सुंदर कन्या का रूप ले लिया। महादेव ने उस कन्या का नाम नर्मदा रखा क्योंकि वह नम्र और आनंद प्रदान करने वाली थी। महादेव ने उसे धरती पर जाकर नदी होने का वरदान दिया और कहा ‘तुम हमेशा जल से पूर्ण रहोगी। जो भी तुम्हारे पवित्र जल से स्नान करेगा, उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे।’ इसलिए नर्मदा को शिवजी की पुत्री कहा जाता है।


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नर्मदा को क्यों कहते हैं कुंवारी नदी?

नर्मदा को कुंवारी नदी भी कहा जाता है। इसके पीछे भी कईं कथाएं प्रचलित हैं। ऐसी ही एक कथा के अनुसार, नर्मदा नदी का विवाह शोण भद्र नदी से तय हुआ था, लेकिन शोण भद्र की रुचि किसी अन्य नदी में थी। जब ये बात नर्मदा को पता चली तो वे अपना ये अपमान सहन नहीं कर सकीं और आजीवन कुंवारी रहने का संकल्प लेकर उलटी दिशा में बहने लगी।


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कैसे उल्टी बहती है नर्मदा?

हमारे देश में अनेक नदियां हैं, लेकिन इन सभी में एकमात्र नर्मदा ही ऐसी नदी है जो उल्टी दिशा में बहती है। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो भारत की लगभग सभी नदियां पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर बहती हैं वहीं नर्मदा एक ऐसी नदी है जो पूर्व दिशा से पश्चिम की ओर जाती है और अरब सागर में मिलती है। नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक है। ये नदी मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों से होती हुई गुजरात में प्रवेश करती है और अमर सागर में मिल जाती है।


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