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Ratha Saptami 2026: कब है रथ सप्तमी, कैसे करें सूर्यदेव की पूजा? जानें विधि, मंत्र और मुहूर्त

Ratha Saptami 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष में रथ सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सूर्यदेव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस पर्व को अचला सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। जानें 2026 में कब है रथ सप्तमी?

4 Min read
Author : Manish Meharele
Published : Jan 24 2026, 09:53 AM IST
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कब है रथ सप्तमी 2026?
Image Credit : Getty

कब है रथ सप्तमी 2026?

Ratha Saptami 2026 Shubh Muhurat: धर्म ग्रंथों के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि बहुत ही खास होती है। इस दिन रथ सप्तमी का पर्व मनाया जाता है, पुराणों में इसे अचला सप्तमी भी कहा गया है। इस दिन सूर्यदेव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। मान्यता है कि इसी तिथि पर सूर्यदेव 7 घोड़ों के रथ पर सवार होकर प्रकट हुए थे। आगे जानें 2026 में कब किया जाएगा रथ सप्तमी व्रत, इसकी विधि और मुहूर्त…


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कब करें रथ सप्तमी व्रत 2026? (Ratha Saptami 2026 Date)
Image Credit : Getty

कब करें रथ सप्तमी व्रत 2026? (Ratha Saptami 2026 Date)

पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 25 जनवरी, शनिवार की रात 12 बजकर 40 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 25 जनवरी रविवार की रात 11 बजकर 10 मिनिट तक रहेगी। इस दिन सिद्ध, साध्य, वर्धमान, आनंद और सर्वार्थसिद्धि नाम के 5 शुभ योग दिन भर रहेंगे, जिसके चलते इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है।


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रथ सप्तमी 2026 पूजा शुभ मुहूर्त
Image Credit : Getty

रथ सप्तमी 2026 पूजा शुभ मुहूर्त

रथ सप्तमी पर पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से गंगा नदी में स्नान का फल मिलता है। रथ सप्तमी पर स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 26 मिनिट से 07 बजकर 13 मिनिट तक रहेगा। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं-
सुबह 08:34 से 09:56 तक
सुबह 09:56 से 11:17 तक
दोपहर 12:17 से 01:00 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 02:00 से 03:22 तक

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इस विधि से करें रथ सप्तमी व्रत (Ratha Saptami Puja Vidhi)
Image Credit : Getty

इस विधि से करें रथ सप्तमी व्रत (Ratha Saptami Puja Vidhi)

- 25 जनवरी, रविवार की सुबह शुभ मुहूर्त में नदी या सरोवर में स्नान करें। ऐसा न कर पाएं तो घर पर ही पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। इससे भी आपको गंगा नदी में स्नान का फल मिलेगा।
- नहाने के बाद तांबे के दीपक में तिल का तेल डालकर इसे जलाएं। इस दीपक को सिर पर रखकर सूर्यदेव का ध्यान करें और ये मंत्र बोलें-
नमस्ते रुद्ररूपाय रसानाम्पतये नम:।
वरुणाय नमस्तेस्तु हरिवास नमोस्तु ते।।
यावज्जन्म कृतं पापं मया जन्मसु सप्तसु।
तन्मे रोगं च शोकं च माकरी हन्तु सप्तमी।
जननी सर्वभूतानां सप्तमी सप्तसप्तिके।
सर्वव्याधिहरे देवि नमस्ते रविमण्डले।।
- इसके बाद तांबे के दीपक को नदी में प्रवाहित कर दें। अब फूल, धूप, दीप, कुमकुम, चावल आदि चढ़ाकर सूर्यदेव की पूजा करें। पूजा के बाद गुड़, घी, तिल ब्राह्मण को दान करें।
- इस दिन निर्जला उपवास किया जाता है यानी दिन भर कुछ खाए-पीएं नहीं। ऐसा करना संभव न हो ते फल और गाय का दूध ले सकते हैं। अगले दिन यानी 26 जनवरी, सोमवार को व्रत का पारणा करें।

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सूर्यदेव की आरती लिरिक्स हिंदी में
Image Credit : Getty

सूर्यदेव की आरती लिरिक्स हिंदी में

ऊं जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान ।
जगत् के नेत्र स्वरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ।
धरत सब ही तव ध्यान,
ऊं जय सूर्य भगवान ॥
॥ ऊं जय सूर्य भगवान..॥
सारथी अरूण हैं प्रभु तुम,
श्वेत कमलधारी ।
तुम चार भुजाधारी ॥
अश्व हैं सात तुम्हारे,
कोटी किरण पसारे ।
तुम हो देव महान ॥
॥ ऊं जय सूर्य भगवान..॥
ऊषाकाल में जब तुम,
उदयाचल आते ।
सब तब दर्शन पाते ॥
फैलाते उजियारा,
जागता तब जग सारा ।
करे सब तब गुणगान ॥
॥ ऊं जय सूर्य भगवान..॥
संध्या में भुवनेश्वर,
अस्ताचल जाते ।
गोधन तब घर आते॥
गोधुली बेला में,
हर घर हर आंगन में ।
हो तव महिमा गान ॥
॥ ऊं जय सूर्य भगवान..॥
देव दनुज नर नारी,
ऋषि मुनिवर भजते ।
आदित्य हृदय जपते ॥
स्त्रोत ये मंगलकारी,
इसकी है रचना न्यारी ।
दे नव जीवनदान ॥
॥ ऊं जय सूर्य भगवान..॥
तुम हो त्रिकाल रचियता,
तुम जग के आधार ।
महिमा तब अपरम्पार ॥
प्राणों का सिंचन करके,
भक्तों को अपने देते ।
बल बृद्धि और ज्ञान ॥
॥ ऊं जय सूर्य भगवान..॥
भूचर जल चर खेचर,
सब के हो प्राण तुम्हीं ।
सब जीवों के प्राण तुम्हीं ॥
वेद पुराण बखाने,
धर्म सभी तुम्हें माने ।
तुम ही सर्व शक्तिमान ॥
॥ ऊं जय सूर्य भगवान..॥
पूजन करती दिशाएं,
पूजे दश दिक्पाल ।
तुम भुवनों के प्रतिपाल ॥
ऋतुएं तुम्हारी दासी,
तुम शाश्वत अविनाशी ।
शुभकारी अंशुमान ॥
॥ ऊं जय सूर्य भगवान..॥
ऊं जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान ।
जगत के नेत्र रूवरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ॥
धरत सब ही तव ध्यान,
ऊं जय सूर्य भगवान ॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

About the Author

MM
Manish Meharele
मनीष मेहरेले। मीडिया में 19 साल का अनुभव, अभी एशियानेट न्यूज हिंदी के डिजिटल में काम कर रहे हैं। महाभारत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। ज्योतिष-हस्तरेखा, उपाय, वास्तु, कुंडली जैसे टॉपिक पर पकड़ है। यह जीव विज्ञान में बीएससी स्नातक हैं । करियर की शुरुआत स्थानीय अखबार दैनिक अवंतिका से की। 2010 से 2019 तक दैनिक भास्कर डॉट कॉम में धर्म डेस्क पर काम किया है।
पूजा विधि
शुभ मुहूर्त

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