
Shardiya Navratri Havan Vidhi: शारदीय नवरात्रि से जुड़ी अनेक परंपराएं हैं, हवन भी इन परंपराओं में से एक है। आमतौर पर नवरात्रि के अंतिम दिन यानी नवमी तिथि पर हवन किया जाता है। इस बार शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि का संयोग 19 और 20 अक्टूबर यानी 2 दिन बन रहा है। ऐसे में नवमी तिथि का हवन कब करें, ये सवाल सभी के मन में उठ रहा है। आगे जानिए हवन की सही डेट, विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त की डिटेल…
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, अनेक स्थानों पर नवमी तिथि पर ही हवन करने की परंपरा है और कुछ स्थानों पर। नवमी तिथि के अगले दिन यानी दशमी पर हवन किया जाता है। जो लोग नवमी पर हवन करना चाहते हैं वे 19 अक्टूबर को और जो जहां दशमी पर हवन की परंपरा है, वे लोग 20 अक्टूबर को हवन कर सकत हैं। इसके लिए स्थानीय विद्वानों से भी चर्चा जरूर करें।
सुबह 09:20 से 10:46 तक
दोपहर 11:48 से 12:34 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 01:37 से 03:03 तक
शाम 04:28 से 05:54 तक
शाम 05:54 से 07:28 तक
हवन करने के लिए हवन कुंड, आम की सूखी लकड़ियां, गाय का घी, हवन सामग्री, जौ, काले तिल, चावल, लौंग, इलायची, गुग्गुल, कपूर, चंदन, फूल, लाल मौली और एक सूखा नारियल
- हवन वाले स्थान को साफ करें। इसके बाद मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर फूल और प्रसाद अर्पित करें।
- हवन कुंड को सुरक्षित और खुली हवा वाली जगह पर रखें। उसमें आम की सूखी लकड़ियां लगाएं और अग्नि प्रज्वलित करें।
- अग्नि प्रज्वलित होने के बाद घी और हवन सामग्री की थोड़ी-थोड़ी मात्रा अग्नि में अर्पित करें। इस दौरान देवी-देवताओं के मंत्रों का जाप करें।
- नवरात्रि हवन में मां दुर्गा के नवार्ण मंत्र का जाप विशेष रूप से किया जाता है। अपनी पूजा परंपरा के अनुसार मंत्र बोलकर आहुति दें।
- हवन के अंत में परंपरा के अनुसार पूर्णाहुति दें। इसके बाद मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
हवन के दौरान इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
1. मां दुर्गा का नवार्ण मंत्र
ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा॥
2. गणेश जी का मंत्र
ऊं गणेशाय नमः स्वाहा॥
3. मां दुर्गा का मंत्र
ऊं दुर्गायै नमः स्वाहा॥
4. पूर्णाहुति मंत्र
ऊं पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हवन देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और पूजा का समापन करने का एक पारंपरिक तरीका है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने के बाद कई परिवार अष्टमी या नवमी को हवन करते हैं। इसके बाद कन्या पूजन और प्रसाद वितरण की परंपरा भी निभाई जाती है। पूजा के क्रम में परिवार की परंपरा और स्थानीय पंडित की सलाह का पालन किया जा सकता है।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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