- पापमोचिनी एकादशी से एक दिन पहले यानी 14 मार्च, शनिवार की रात को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। संभव हो तो जमीन पर चटाई बिछाकर सोएं।
- 15 मार्च, रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। घर में जहां पूजा करनी है, उस स्थान की साफ-सफाई कर लें।
- शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र एक लकड़ी के पटिए पर स्थापित करें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं, कुमकुम का तिलक लगाएं और माला भी पहनाएं।
- इसके बाद भगवान की तस्वीर पर रोली, अबीर, गुलाल आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाते रहें। पूजा के दौरान ऊं नमो वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करते रहें।
- इसके बाद अपनी इच्छा अनुसार भगवान को भोग लगाएं और आरती करें। पूरे दिन किसी पर क्रोध न करें और न ही किसी के प्रति बुरे विचार मन में लाएं।
- रात में सोएं नहीं, भगवान के भजन-कीर्जन करते रहें। अगले दिन सुबह यानी 16 मार्च, सोमवार को एक बार फिर से भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें।
- इसके बाद व्रत का विधि पूर्वक पारण करें। ब्राह्मणों को घर बुलाकर भोजन करवाएं और दान-दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें। उनके जाने के बाद स्वयं भोजन करें।
- इस प्रकार जो व्यक्ति पापमोचनी एकादशी का व्रत करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि व शांति बनी रहती है।
Disclaimer
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