Papmochani Ekadashi Kab Hai: हिंदू वर्ष विक्रम संवत की सबसे अंतिम एकादशी का नाम पापमोचनी है। इस बार पापमोचनी एकादशी का व्रत मार्च 2026 के अंतिम सप्ताह में किया जाएगा। इस दिन कईं शुभ योग बनेंगे।
Papmochani Ekadashi 2026 Date: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहते हैं। ये एकादशी बहुत खास है क्योंकि ये हिंदू वर्ष विक्रम संवत की अंतिम एकादशी होती है। इस बार पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च, रविवार को किया जाएगा। इसका महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। इस एकादशी के बारे में भविष्योत्तर पुराण में भी बताया गया है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है। आगे जानिए इस बार कब है पापमोचनी एकादशी, इसकी पूजा विधि,, शुभ मुहूर्त व अन्य खास बातें…
पापमोचनी एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी, शनिवार को किया जाएगा। पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 30 मिनिट से शुरू होकर 08 बजकर 54 मिनिट तक रहेगा। विधि-विधान से पारण करने के बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है।
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इस विधि से करें पापमोचनी एकादशी का व्रत
- पापमोचिनी एकादशी से एक दिन पहले यानी 14 मार्च, शनिवार की रात को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। संभव हो तो जमीन पर चटाई बिछाकर सोएं। - 15 मार्च, रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। घर में जहां पूजा करनी है, उस स्थान की साफ-सफाई कर लें। - शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र एक लकड़ी के पटिए पर स्थापित करें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं, कुमकुम का तिलक लगाएं और माला भी पहनाएं। - इसके बाद भगवान की तस्वीर पर रोली, अबीर, गुलाल आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाते रहें। पूजा के दौरान ऊं नमो वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करते रहें। - इसके बाद अपनी इच्छा अनुसार भगवान को भोग लगाएं और आरती करें। पूरे दिन किसी पर क्रोध न करें और न ही किसी के प्रति बुरे विचार मन में लाएं। - रात में सोएं नहीं, भगवान के भजन-कीर्जन करते रहें। अगले दिन सुबह यानी 16 मार्च, सोमवार को एक बार फिर से भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। - इसके बाद व्रत का विधि पूर्वक पारण करें। ब्राह्मणों को घर बुलाकर भोजन करवाएं और दान-दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें। उनके जाने के बाद स्वयं भोजन करें। - इस प्रकार जो व्यक्ति पापमोचनी एकादशी का व्रत करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि व शांति बनी रहती है।
Disclaimer इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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