
Parama Ekadashi Vrat 2026: धर्म ग्रंथों के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की परम एकादशी का व्रत 11 जून, गुरुवार को किया जाएगा। भगवान विष्णु को समर्पित यह एकादशी बहुत ही शुभ फल देने वाली मानी गई है। मान्यताओं के अनुसार, परम एकादशी का व्रत करने और इसकी कथा सुनने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस व्रत से जुड़ी कथा भी बहुत रोचक है, इसे सुनने के बाद ही व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे पढ़ें परमा एकादशी व्रत की रोचक कथा…
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प्राचीन समय में काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नाम के एक धर्मात्मा ब्राह्मण अपनी पतिव्रता पत्नी के साथ रहते थे। दोनों अत्यंत गरीब थे और भिक्षा मांगने पर भी उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिलता था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद ब्राह्मण की पत्नी अपने पति की सेवा करती और अतिथियों का सत्कार करने में कभी पीछे नहीं हटती थी।
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एक दिन सुमेधा ने अपनी पत्नी से कहा कि वह धन कमाने के लिए परदेश जाना चाहता है, क्योंकि बिना धन के गृहस्थ जीवन चलाना कठिन हो रहा था। लेकिन उसकी पत्नी ने समझाया कि मनुष्य को अपने पूर्व जन्म के कर्मों का फल मिलता है और भाग्य में जो लिखा है, वही प्राप्त होता है। उसने पति से कहीं न जाने का आग्रह किया। पत्नी की बात मानकर सुमेधा घर पर ही रुक गया।
कुछ समय बाद उनके घर पर महर्षि कौण्डिन्य पधारे। दंपति ने उनका आदर-सत्कार किया। तब ब्राह्मण की पत्नी ने अपनी दरिद्रता दूर करने का उपाय पूछा। महर्षि ने उन्हें मलमास के कृष्ण पक्ष में आने वाली परम एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यह व्रत सभी पापों, दुखों और दरिद्रता को दूर करने वाला है। साथ ही उन्होंने पांच दिन तक किए जाने वाले पंचरात्रि व्रत का महत्व भी बताया।
महर्षि के निर्देशानुसार ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने श्रद्धापूर्वक परम एकादशी और पंचरात्रि व्रत का पालन किया। व्रत पूर्ण होने के बाद ब्रह्माजी की प्रेरणा से एक राजकुमार उनके पास आया और उन्हें रहने के लिए सुंदर घर तथा जीविका के लिए एक गांव प्रदान किया।
परम एकादशी व्रत के प्रभाव से वह दंपत्ति सुख-समृद्धि से जीवन व्यतीत करने लगा। अंत में उन्होंने सांसारिक सुखों का भोग करने के बाद स्वर्गलोक की प्राप्ति की। यही कारण है कि परम एकादशी को दरिद्रता दूर करने और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाला अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना गया है।
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