Parama Ekadashi 2026 Date: अधिक मास की परमा एकादशी का व्रत कब किया जाएगा? परमा एकादशी का एक और नाम क्या प्रसिद्ध है? परमा एकादशी व्रत में किसकी पूजा करने का विधान है?
Kab Hai Parama Ekadashi 2026: धर्म ग्रंथों में अधिक मास का विशेष महत्व बताया गया है। अधिक मास 3 साल में एक बार आता है। साल 2026 में ज्येष्ठ का अधिक मास 17 मई से शुरू हो चुका है जो 15 जून तक रहेगा। अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा और कमला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी का महत्व अन्य एकादशियों से कहीं अधिक है। जानें कब है परमा एकादशी, कैसे करें व्रत, पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त…
ये भी पढ़ें-
Job Interview पर जाने से पहले करें 1 मंत्र का जाप, बढ़ जाएंगे सक्सेस के चांस

कब है परमा एकादशी 2026?
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जून, बुधवार की रात 12:58 से 11 जून, गुरुवार की रात 10:36 तक रहेगी। एकादशी तिथि का सूर्योदय 11 जून को होगा, इसलिए इसी दिन परमा एकादशी का व्रत किया जाएगा।
ये भी पढ़ें-
अधिक मास की शिवरात्रि कब है, 13 या 14 जून? आज ही दूर करें कन्फ्यूजन
परमा एकादशी 2026 पूजा मुहूर्त
- सुबह 10:46 से दोपहर 12:26 तक
- दोपहर 11:59 सो 12:53 तक
- दोपहर 12:26 से 02:06 तक
- दोपहर 02:06 से 03:47 तक
कैसे करें परमा एकादशी व्रत-पूजा?
- एकादशी से एक दिन पहले यानी 10 जून, बुधवार से ही व्रत के नियमों का पालन करें। रात को सात्विक भोजन करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- 11 जून, गुरुवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लें। दिन भर किसी से झूठ न बोलें, किसी पर क्रोध न करें।
- जहां पूजा करनी है उस स्थान की सफाई करें और गंगा जल या गौमूत्र छिड़ककर पवित्र कर लें। पूजा की सामग्री एक स्थान पर रख लें।
- शुभ मुहूर्त में लकड़ी के बाजोट पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान की प्रतिमा को तिलक लगाकर हार पहनाएं।
- पूजा स्थान पर शुद्ध घी का दीपक लगाएं। कुंकुम, चावल, रोली, अबीर, गुलाल, फूल आदि चीजें एक-एक करके भगवान को अर्पित करें।
- पूजा करते समय मन ही मन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करते रहें। अपनी इच्छा अनुसार भगवान को भोग लगाएं।
- भोग में तुलसी के पत्ते जरूर रखें। पूजा के बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु की आरती करें। रात को भजन-कीर्तन करें, सोएं नहीं।
- अगले दिन यानी 12 जून, शुक्रवार की सुबह ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और दान- दक्षिणा देकर विदा करें। इसके बाद स्वयं भोजन करें।
- इस तरह परमा एकादशी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और हर तरह का सुख भी जीवन में मिलते हैं।
भगवान विष्णु की आरती लिरिक्स हिंदी में
ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ओम जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ओम जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ओम जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ओम जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ओम जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ओम जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ओम जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ओम जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ओम जय जगदीश हरे।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
