Pitru Paksha 2026: कब से शुरू होगा श्राद्ध पक्ष, कितने दिनों का रहेगा? नोट करें पितृ पक्ष का पूरा कैलेंडर

Published : Aug 31, 2026, 03:41 PM IST
Pitru Paksha 2026

सार

Pitru Paksha Calendar 2026: हर साल आश्विन मास में श्राद्ध पक्ष आता है। इस दौरान लोग अपने मृत पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान आदि कर्म करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

Pitru Paksha 2026 Start Date: हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व माना गया है। यह समय पूर्वजों को याद करने और उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ किए गए इन कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। आगे जानिए इस बार पितृ पक्ष कब से शुरू होगा और किस दिन कौन-सी तिथि रहेगी…

2026 में कब से शुरू होगा पितृपक्ष?

पंचांग के अनुसार, 26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर 2026, रविवार से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ पितृपक्ष की शुरुआत मानी जाएगी। पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। आमतौर पर श्राद्ध पक्ष 16 दिनों का होता है लेकिन इस बार ये 15 दिनों का रहेगा। ऐसा तिथि क्षय होने के कारण होगा।

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पितृपक्ष 2026 की श्राद्ध तिथियां

26 सितंबर 2026: पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर: प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर: द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर: तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर: चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर: षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर: सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर: अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर: नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर: दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर: एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर: द्वादशी श्राद्ध
8 अक्टूबर: त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर: चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर: सर्वपितृ अमावस्या

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किस दिन करना चाहिए पितरों का श्राद्ध?

पितृपक्ष में श्राद्ध करने के लिए पूर्वज की मृत्यु तिथि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुई थी तो पितृपक्ष की अष्टमी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है। अगर किसी कारण से मृत्यु तिथि याद नहीं है या परिवार में किसी ऐसे पूर्वज का श्राद्ध करना है जिनकी तिथि ज्ञात नहीं है, तो सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है।

पितृ पक्ष में क्यों करें श्राद्ध, पिंडदान?

ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पितर अपने परिवार वालों को आशीर्वाद देने धरती पर आते हैं और उनके द्वारा किए गए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से अति प्रसन्न होते हैं। जो लोग अपने पितरों के लिए श्राद्ध पक्ष में पिंडदान आदि नहीं करते, पितृ उनसे नाराज हो जाते हैं। इसलिए श्राद्ध पक्ष के दौरान तर्पण आदि जरूर करना चाहिए।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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