
Kab Se Shuru Hoga Pitru Paksha: भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक के समय को श्राद्ध पक्ष कहते हैं। इन दौरान लोग अपने मृत पितरों की शांति के लिए कईं उपाय जैसे श्राद्ध आदि करते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. नलिन शर्मा के अनुसार, इस बार भाद्रपद पूर्णिमा की तिथि 26 सितंबर, शनिवार को है है। ऐसे में इसी दिन से पितृ पक्ष की शुरुआत मानी जाएगी। इस बार तिथि क्षय होने के कारण श्राद्ध पक्ष 16 के बजाय 15 दिनों का रहेगा। आइए जानते हैं श्राद्ध पक्ष की प्रमुख तिथियां…
पितृ पक्ष की पंचमी तिथि को कुंवारा पंचमी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन उन परिजनों का श्राद्ध किया जाता है, जिनका निधन विवाह से पहले हो गया हो। इस बार कुंवारा पंचमी का श्राद्ध 1 अक्टूबर, गुरुवार को किया जाएगा।
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पितृ पक्ष की नवमी तिथि मातृ नवमी के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन परिवार की दिवंगत महिलाओं के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, खासतौर पर उन महिलाओं का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन सुहागिन अवस्था में हुआ हो। इस बार मातृ नवमी 4 अक्टूबर, रविवार को होगी।
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पितृ पक्ष की द्वादशी तिथि पर संन्यासी श्राद्ध करने की परंपरा है। परिवार में यदि किसी पूर्वज ने संन्यास ग्रहण किया था, तो इस दिन उनके निमित्त श्राद्ध किया जाता है। इस बार संन्यासी श्राद्ध 7 अक्टूबर, बुधवार को किया जाएगा।
पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि उन लोगों के श्राद्ध के लिए मानी जाती है जिनकी मृत्यु किसी दुर्घटना, घटना या शस्त्राघात जैसी असामान्य परिस्थिति में हुई हो। इस तिथि को शस्त्राघात मृतका श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है। इस बार यह श्राद्ध 9 अक्टूबर, शुक्रवार को किया जाएगा।
पितृ पक्ष की आखिरी तिथि सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या होती है। जिन लोगों को अपने किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि मालूम नहीं होती, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने की परंपरा है। इस बार सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को होगी। इसी के साथ पितृ पक्ष का समापन माना जाएगा।
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