Prachin Shiv Mandir: प्राचीन शिव मंदिर, जहां पूजा करने से उतर जाता है बड़े से बड़ा कर्ज, इसलिए कहते ‘ऋणमुक्तेश्वर’

Published : Feb 09, 2026, 11:49 AM IST
Prachin Shiv Mandir

सार

Famous Shiv Mandir In India: हमारे देश में भगवान शिव के अनेक प्राचीन मंदिर हैं। इन मंदिरों से कोई न कोई मान्यता जुड़ी हुई है। ऐसा ही एक मंदिर है ऋणमुक्तेश्वर महादेव। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से बड़े से बड़ा कर्ज चुकता हो जाता है।

2026 Maha Shivaratri Date: इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन प्रमुख शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। महारे देश में महादेव के अनेक ऐसे प्राचीन मंदिर हैं जिनसे कोई न कोई रोचक मान्यता जुड़ी हुई है। ऐसा ही एक मंदिर है ऋणमुक्तेश्वर महादेव। मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से बड़े से बड़ा कर्ज आसानी से चुकता हो जाता है, इसलिए इसे ऋणमुक्तेश्वर महादेव के नाम से जाता है। इस मंदिर से अनेक रोचक कथाएं भी जुड़ी हैं। आगे जानिए कहां है ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर और इससे जुड़ी खास बातें…

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कहां है ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर?

पुराणों में जिन सप्तपुरियों यानी सबसे प्राचीन 7 शहरों के बारे में बताया गया है, उनमें उज्जियनी भी एक है। वर्तमान में इसे उज्जैन के नाम से जाना जाता है। यहां 12 ज्योर्तिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर भी स्थित है। यहीं पर क्षिप्रा नदी के किनारे एक और प्राचीन शिव मंदिर है, जिसे ऋणमुक्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। रोज हजारों भक्त यहां दर्शन करने आते हैं। कर्ज से छुटकारा पाने के लिए यहां विशेष पूजा भी की जाती है।

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यहां होती है पीली पूजा 

ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर पर पीली पूजा करवाने की परंपरा है। मान्यता है कि ये पूजा करवाने से बड़े से बड़ा कर्ज भी आसानी से उतर जाता है। इस पूजा में पीले कपड़े में चने की दाल, हल्दी, गुड़ आदि चीजें बांधकर महादेव को अर्पित किया जाता है। मंदिर में प्रवेश करते ही आपको यहां पीले कपड़े में बंधी पोटली देखने को मिल जाएगी। पुजारी विशेष मंत्रों को बोलते हुए पीली पूजा करवाते हैं जिसका प्रभाव शीघ्र ही देखने को मिलता है।

राजा हरिशचंद्र को मिला था कर्ज से छुटकारा

मान्यता है कि ये मंदिर त्रेता युग से भी पहले का है। इससे जुड़ी एक कथा भी प्रचलित है जो भगवान श्रीराम के पूर्वज राजा हरिशचंद्र से जुड़ी है। उसके अनुसार एक बार राजा हरिश्चंद्र ने ऋषि विश्वामित्र को दान देने का संकल्प किया था और जब वह संकल्प पूरा न कर पाए तो उन्होंने इस स्थान पर आकर महोदव की पूजा की। जिससे प्रसन्न होकर महादेव उन्हें ऋण मुक्त होने का वरदान दिया। तभी से ये स्थान ऋणमुक्तेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।


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