
उज्जैन. अंग्रेजी कैलेंडर की तरह ही हिंदू पंचांग को भी 12 महीनों में बांटा गया है। हिंदू पंचांग का पहला महीना चैत्र है। हालांकि हिंदू नववर्ष का आरंभ चैत्र महीने के 15 दिन बाद यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। (Chaitra month 2023 Fastival list) इस महीने के पहले ही दिन होली उत्सव मनाया जाता है। इसके बाद रंगपंचमी, चैत्र नवरात्रि, गणगौर और रामनवमी जैसे पर्व भी मनाए जाते हैं। इस बार चैत्र मास 8 मार्च से शुरू होकर 6 अप्रैल तक रहेगा। जानें इस महीने से जुड़ी खास बातें…
चैत्र मास के प्रमुख व्रत-त्योहार
8 मार्च, बुधवार- धुरेड़ी, होली उत्सव
9 मार्च, गुरुवार- भगवान चित्रगुप्त पूजा
10 मार्च, शुक्रवार- गणेश चतुर्थी व्रत
12 मार्च, रविवार- रंगपंचमी
13 मार्च, सोमवार- एकनाथ छठ
14 मार्च, मंगलवार- भानु सप्तमी, शीतला सप्तमी
15 मार्च, बुधवार- शीतला अष्टमी, खर मास आरंभ
18 मार्च, शनिवार- पापमोचनी एकादशी
19 मार्च, रविवार- प्रदोष व्रत, वारुणी पर्व
20 मार्च, सोमवार- शिव चतुर्दशी व्रत
21 मार्च, मंगलवार- चैत्र अमावस्या
22 मार्च, बुधवार- गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्र आरंभ, हिंदू नववर्ष आरंभ
23 मार्च, गुरुवार- चेटीचंड, भगवान झूलेलाल जयंती, सिंधारा दोज
24 मार्च, शुक्रवार- सौभाग्य सुंदरी व्रत, गणगौर तीज व्रत
25 मार्च, शनिवार- विनायकी चतुर्थी व्रत
29 मार्च, बुधवार- महा अष्टमी व्रत
30 मार्च, गुरुवार- श्रीराम नवमी, जवारे विसर्जन, दुर्गा नवमी, रामचरित मानस जयंती
1 अप्रैल, शनिवार- कामदा एकादशी व्रत
2 अप्रैल, रविवार- मदन द्वादशी
3 अप्रैल, सोमवार- प्रदोष व्रत
4 अप्रैल, मंगलवार- महावीर स्वामी जयंती
5 अप्रैल, बुधवार- व्रत पूर्णिमा
6 अप्रैल, गुरुवार- हनुमान प्रकटोत्सव
चैत्र मास में ही शुरू होगा खर मास
चैत्र मास के दौरान 15 मार्च को सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेगा। ऐसा होते ही मल मास शुरू हो जाएगा। ये 14 अप्रैल तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह आदि नहीं किए जा सकेंगे। धर्म ग्रंथों में भी खर या मल मास का विशेष महत्व बताया गया है। इस महीने में भगवान सूर्यदेव की पूजा विशेष रूप से करनी चाहिए और दान-पुण्य भी करना चाहिए।
हिंदू नववर्ष भी इसी महीने में
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष से ही हिंदू नववर्ष का आरंभ माना जाता है। इस बार 22 मार्च को विक्रम संवत 2080 आरंभ होगा जिसका नाम पिंगल है। इसी दिन गुड़ी पड़वा का पर्व भी मनाया जाएगा। इस हिंदू नववर्ष के राजा बुध और मंत्री शुक्र है। इस तिथि से कई मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं। एक मान्यता ये भी है कि ब्रह्मदेव ने इसी दिन से सृष्टि को बनाने का काम आरंभ किया था।
चैत्र नवरात्रि और राम नवमी भी इसी महीने में
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से ही चैत्र नवरात्रि का भी आरंभ होता है। 9 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में रोज देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में इसी तिथि पर भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या के राजा दशरथ के यहां पुत्र रूप में हुआ था।
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