Choti Diwali 2025: छोटी दीवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए और कहां-कहां?

Published : Oct 19, 2025, 01:57 PM IST

छोटी दिवाली 2025 नरक चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस दिन यमराज, हनुमानजी और देवी काली की पूजा की जाती है। घर में कम से कम 14 दीपक जलाना शुभ माना जाता है। यम दीपक को दक्षिण दिशा में और अन्य स्थानों पर विशेष दीपक रखने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

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छोटी दिवाली पर किस भगवान को पूजते हैं?

धनतेरस के अगले दिन छोटी दिवाली मनाई जाती है। आज पूरे देश में छोटी दिवाली मनाई जा रही है। इस दिन भगवान हनुमान और देवी काली की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि इस दिन यमराज की भी पूजा की जाती है। छोटी दिवाली पर घरों में दीपक जलाए जाते हैं। शाम को देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। आइए जानें कि दिवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए और उन्हें कहां रखना चाहिए?

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छोटी दिवाली पूजा मुहूर्त

इस वर्ष कार्तिक मास की चतुर्दशी तिथि 19 अक्टूबर 2025 को दोपहर 1:51 बजे से शुरू होगी। यह तिथि 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 3:44 बजे समाप्त होगी। अभ्यंग स्नान का समय सुबह 5:12 बजे से 6:25 बजे तक था। पूजा का समय शाम 5:47 बजे शुरू होगा। छोटी दिवाली पर पूजा सूर्यास्त के बाद ही की जाती है। इसलिए, शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक पूजा की जा सकती है।

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छोटी दिवाली पर कितने दीपक जलाएं?

छोटी दिवाली पर 14 दीपक जलाना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन जलाए गए प्रत्येक दीपक को एक विशेष स्थान पर रखना चाहिए। छोटी दिवाली पर अपनी आस्था के अनुसार कितने भी दीपक जलाए जा सकते हैं, लेकिन इस दिन कम से कम 14 दीपक जलाने का प्रयास करना चाहिए, 14 से कम दीपक नहीं जलाने चाहिए।

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छोटी दिवाली पर दीपक कहां रखें?
  • यमराज के लिए जलाया जाने वाला एक दीपक दक्षिण दिशा में रखना चाहिए।
  • दूसरा दीपक देवी काली के लिए जलाना चाहिए।
  • तीसरा दीपक भगवान श्री कृष्ण के लिए जलाना चाहिए।
  • चौथा दीपक घर के मुख्य द्वार पर रखना चाहिए।
  • पांचवां दीपक घर की पूर्व दिशा में रखना चाहिए।
  • छठा दीपक रसोई में रखना चाहिए।
  • सातवां दीपक छत पर रखना चाहिए।
  • आठवां दीपक तुलसी के पौधे के पास रखना चाहिए।
  • नौवां दीपक बालकनी में या सीढ़ियों के पास रखना चाहिए।
  • अन्य दीपक परिवार के इष्ट देवता और अन्य देवी-देवताओं के नाम पर जलाना चाहिए।
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छोटी दिवाली का महाउपाय

छोटी दिवाली पर गोबर से बने दीये जलाने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि यह अनुष्ठान यम की यातनाओं से मुक्ति दिलाता है। प्रदोष काल में यम के मंत्र का जाप करते हुए चार बत्तियों वाला दीपक जलाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि यह अनुष्ठान यम और भूत-प्रेत के भय से मुक्ति दिलाता है। दिवाली के पंचपर्व (पांच दिन) में यम की पूजा विशेष रूप से की जाती है। उल्लेखनीय है कि दिवाली के पांच त्योहारों में से, न केवल नरक चतुर्दशी, बल्कि भैया दूज भी यम और यमुना माता से जुड़ा है।

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छोटी दिवाली पर दीयों का महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार, आजकल घरों में बनने वाले दीयों की मालाएं मुख्य दिवाली पर जलाए जाने वाले दीयों से छोटी होती हैं। ऐसा माना जाता है कि छोटी दिवाली पर जलाए गए दीये नकारात्मकता को दूर भगाते हैं और सकारात्मकता लाते हैं। छोटी दिवाली पर जलाए जाने वाले ये दीये इस त्योहार की पवित्रता का प्रतीक हैं।

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