
उज्जैन. इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व 19 सितंबर, मंगलवार को है। मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीगणेश का प्राकट्य हुआ था। (Ganesh Chaturthi 2023) भगवान श्रीगणेश से जुड़ी और भी कईं कथाएं हमारे धर्म ग्रंथों में मिलती है। ऐसी ही एक कहानी उनके भाई कार्तिकेय से भी जुड़ी हुई है। इस कथा का वर्णन गणेश पुराण और शिव महापुराण में भी मिलता है। आगे जानिए क्या है ये कथा, जिससे श्रीगणेश कहलाए प्रथम पूज्य…
गणेश और कार्तिकेय में हुई बहस
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार श्रीगणेश और उनके भाई कार्तिकेय में इस बात पर बहस हो गई कि दोनों में से ज्यादा श्रेष्ठ कौन हैं। चूंकि दोनों ही अपने-अपने गुणों के चलते एक से बढ़कर एक थे, इसलिए इस बात का फैसला कोई नहीं कर पाया। इस बात का निष्कर्ष निकालने के लिए गणेश और कार्तिकेय अपने माता-पिता शिव-पार्वती के पास पहुंचें।
शिवजी ने दी एक मुश्किल चुनौती
जब गणेश और कार्तिकेय ने अपनी बात शिव-पार्वती को बताई तो वे भी इस बात का फैसला नहीं कर पाए। तब शिव ने उन दोनों को सामने एक चुनौती रखी और कहा कि तुम दोनों में जो सबसे पहले इस ब्रह्मांड को तीन चक्कर लगाकर आ जाएगा, वही सर्वश्रेष्ठ कहलाएगा। दोनों भाइयों ने अपने पिता की शर्त को मान लिया और इसे पूरा करने के लिए चल पड़े।
गणेशजी ने दिखाई बुद्धिमानी
कार्तिकेय का वाहन मोर है, वे तुरंत अपने मोर पर सवार हुए और ब्रह्मांड का चक्कर लगाने निकल पड़े। लेकिन गणेशजी का वाहन चूहा इसके लिए सक्षम नहीं था। तब गणेशजी ने बुद्धिमानी से काम लिया और उन्होंने अपने माता-पिता के तीन चक्कर लगा लिए। जब शिवजी ने इसका अर्थ पूछा तो उन्होंने कहा कि सारा ब्रह्माण्ड तो महादेव और माता पार्वती में ही समाया हुआ है, इसलिए मैंने आप दोनों के चक्कर लगाकर संपूर्ण ब्रह्माण की परिक्रमा कर ली है।
श्रीगणेश कहलाए प्रथम पूज्य
जब कार्तिकेय ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लौटे तो उन्हें पूरी बात पता चली। श्रीगणेश की बुद्धिमानी देखकर वे भी काफी प्रसन्न हुए और अपनी हार स्वीकार कर ली। भगवान शिव ने श्रीगणेश को ही दोनों में श्रेष्ठ घोषित किया और प्रथम पूज्य होने का वरदान भी दिया और यानी हर शुभ कार्य से पहले श्रीगणेश की पूजा आवश्यक रूप से की जाएगी।
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