
Ganesh Chaturthi Ki Katha Manyta: हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये तिथि 7 सितंबर, शनिवार को है। मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान श्रीगणेश का जन्म हुआ था। इस पर्व से जुड़ी कई मान्यताएं और परंपरा भी हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं। गणेश चतुर्थी से जुड़ी एक मान्यता ये भी है कि इस पर्व की रात चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। आगे जानिए इस पर्व से जुड़ी कथा…
गणेश चतुर्थी की रात क्यों न देखें चंद्रमा?
गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए, ऐसा करने से चोरी का दोष लग सकता है। इस मान्यता से जुड़ी कथा धर्म ग्रंथों में मिलती है, जो इस प्रकार है- ‘भगवान शिव ने जब श्रीगणेश का मस्तक काटा और उनके धड़ पर हाथी का मुख लगाया तो उनका स्वरूप थोड़ा विचित्र हो गया। जब चंद्रमा ने श्रीगणेश के इस स्वरूप को देखा तो वह मंद-मंद मुस्कुराते रहें। गणेशजी समझ गए कि चंद्रमा उनके इस स्वरूप का मजाक उड़ा रहे हैं।
तब श्रीगणेश में क्रोध में आकर चंद्रमा को श्राप दिया कि ‘आज से तुम काले हो जाओगे।’ श्रीगणेश के श्राप के कारण चंद्रमा की चमक धीरे-धीरे कम होने लगी और वे काले हो गए। तब चंद्रमा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने श्रीगणेश से क्षमा मांगी। गणेशजी ने अपना श्राप वापस ले लिया और कहा कि ‘अब से तुम सूर्य के प्रकाश से जगमगाओगे।’
श्रीगणेश ने कहा कि ‘जो व्यक्ति भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर तुम्हारे दर्शन करेगा, उस पर चोरी का झूठा आरोप लगेगा।’ इसी वजह से गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा के दर्शन पर रोक है। कहते हैं कि एक बार श्रीकृष्ण ने गलती से ऐसा कर लिया तो इसलिए उन पर स्मंयतक मणि की चोरी का आरोप लगा था।
चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो क्या करें?
वैसे तो गणेश चतुर्थी तिथि को चंद्रमा के दर्शन नहीं करना चाहिए, यदि भूल से ऐसा हो जाए तो नीचे लिखे इस मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे इस दोष का निवारण हो सकता है। जो व्यक्ति झूठे आरोप में फंस जाए, वह अगर इस मंत्र का जपकर करे तो जल्दी ही आरोप से मुक्त हो सकता है। ये है वो मंत्र…
सिंह: प्रसेन मण्वधीत्सिंहो जाम्बवता हत:।
सुकुमार मा रोदीस्तव ह्येष: स्यमन्तक:।।
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