
Gopashtami 2025 Kab Hai: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन गाय और उनके बछड़ों की पूजा करने की परंपरा है। वैसे तो ये पर्व पूरे देश में मनाते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन आदि क्षेत्रों में इसकी रौनक सबसे ज्यादा होती है। इस पर्व से जुड़ी कईं मान्यताएं और परंपराएं भी हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं। आगे जानिए कब है गोपाष्टमी, इसकी पूजा विधि, मंत्र मुहूर्त सहित पूरी डिटेल…
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पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 29 अक्टूबर, बुधवार की सबह 09 बजकर 23 मिनिट से शुरू होगी जो 30 अक्टूबर, गुरुवार को सुबह 10 बजकर 06 मिनिट तक रहेगी। चूंकि 29 अक्टूबर, बुधवार को अष्टमी तिथि पूरे दिन रहेगी, इसलिए गोपाष्टमी का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। कुछ पंचांगों में गोपाष्टमी की डेट 30 अक्टूबर भी बताई गई है।
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सुबह 07:58 से 09:22 तक
सुबह 10:46 से दोपहर 12:10 तक
दोपहर 02:58 से शाम 04:22 तक
शाम 04:22 से 05:46 तक
- 29 अक्टूबर, बुधवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल-चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में दूध देने वाली गाय और बछडे़ की पूजा करें।
- गाय और बछड़े को चंदन से तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं। एक बर्तन में पानी लेकर इसमें थोड़े से चावल, सफेद तिल और फूल मिलाकर गाए के पैरों पर डालें और ये मंत्र बोलें-
क्षीरोदार्णवसम्भूते सुरासुरनमस्कृते।
सर्वदेवमये मातर्गृहाणार्घ्य नमो नम:॥
- इसके बाद गाय को तरह-तरह की चीजें और पकवान आदि खिलाएं। गौ माता के पैर छूकर घर की सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना करें। पूजा के बाद गौ माता की आरती करें।
ऊं जय जय गौमाता, मैया जय जय गौमाता |
जो कोई तुमको ध्याता, त्रिभुवन सुख पाता ||
मैया जय जय गौमाता ………………
सुख समृद्धि प्रदायनी, गौ की कृपा मिले |
जो करे गौ की सेवा, पल में विपत्ति टले ||
मैया जय जय गौमाता ……………
आयु ओज विकासिनी, जन जन की माई |
शत्रु मित्र सुत जाने, सब की सुख दाई ||
मैया जय जय गौमाता ………………
सुर सौभाग्य विधायिनी, अमृती दुग्ध दियो |
अखिल विश्व नर नारी, शिव अभिषेक कियो ||
मैया जय जय गौमाता ………………
ममतामयी मन भाविनी, तुम ही जग माता |
जग की पालनहारी, कामधेनु माता ||
मैया जय जय गौमाता ……………संकट रोग विनाशिनी, सुर महिमा गायी |
गौ शाला की सेवा, संतन मन भायी ||
मैया जय जय गौमाता ………………
गौ माँ की रक्षा हित, हरी अवतार लियो |
गौ पालक गौपाला, शुभ सन्देश दियो ||
मैया जय जय गौमाता ………………
श्री गौमात की आरती, जो कोई सुत गावे |
“पदम्” कहत वे तरणी, भव से तर जावे ||
मैया जय जय गौमाता ………………
प्रचलित कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण छोटे थे, तब उन्होंने अपने दोस्तों को जंगल में गाय चराने जाते हुए देखा तो वे भी जंगल में जाने की जिद करने लगे। तब माता यशोदा ने शुभ मुहूर्त निकलवा कर कान्हा से गायों की पूजा करवाई और इसके बाद ही उन्हें गाय चराने के लिए जंगल भेजा। उस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी। तभी से इस तिथि पर गोपाष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है।
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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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