Hanuman Ji Mantra: हनुमान जी के 5 पावरफुल मंत्र, इनके जाप से खत्म हो सकते हैं सारे कष्ट

Published : Aug 04, 2025, 04:27 PM IST
Hanuman ji

सार

Hanuman Ji Powerful Mantra: मंगलवार का दिन हनुमान जी का होता है। भगवान राम भक्त हनुमान जी के कुछ मंत्र ऐसे हैं, जिनका जाप करने से आपके सारे कष्ट दूर हो सकते हैं। आइए जानते हैं उन 5 मंत्रों के बारे में यहां। 

Hanuman Ji Ka Mantra: हिंदू धर्म में हर एक दिन किसी न किसी भगवान से जुड़ा होता है। मंगलवार का दिन राम भक्त हनुमान जी का माना जाता है। हनुमान जी की पूजा करने से सभी तरह की बाधाएं दूर हो जाती हैं। साथ ही भगवान श्री राम का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। मंगलवार के अलावा शनिवार के दिन भी उनकी पूजा की जाती है। मंगलवार के दिन जो कोई भी हनुमान जी की पूजा करता है और उनके मंत्रों का जाप करता है, उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं। ऐसे ही जानिए हनुमान जी के उन पांच मंत्रों के बारे में यहां, जिन्हें जपने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो सकती है।

"ॐ हं हनुमते नमः"

अर्थ- इस मंत्र का मतलब है हे हनुमान जी, मैं आपको नमस्कार करता हूं। इस मंत्र का जाप भगवान की कृपा, शक्ति और बाधाओं से सुरक्षा पाने के लिए किया जाता है।

ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा:

अर्थ- हे भगवान, मैं बलशाली अंजनेय को नमन करता हूं, और समर्पण करता हूं

ॐ रामदूताय विद्महे कपिराजाय धीमहि अंजनी पुत्र चिरंजीवे तन्नो हनुमत प्रचोदयात्:

अर्थ- इस मंत्र का मतलब है हम भगवान राम के दूत और वानरों के राजा को जानते हैं। अंजनी के पुत्र, चिरंजीवी, हनुमान हमें प्रेरित करें।

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पंचमुखी हनुमान मंत्र: ॐ ह्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रः ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट:

अर्थ- हे हनुमान जी , जो रुद्र के समन हैं, मैं आपको नमन करता हूं, मेरी रक्षा करें। इस मंत्र का इस्तेमाल बुरी शक्तियों से दूर रहने के लिए किया जाता है।

संकट कटे, मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा:

अर्थ- जो व्यक्ति हनुमान जी का ध्यान करता है। उसके सारे कष्ट और संकट मिट जाते हैं।

हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti)

आरती कीजै हनुमान लला की।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।

रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अंजनि पुत्र महाबलदायी।

संतान के प्रभु सदा सहाई।।

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दे बीरा रघुनाथ पठाए।

लंका जारी सिया सुध लाए।।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई।

जात पवनसुत बार न लाई।।

 

लंका जारी असुर संहारे।

सियारामजी के काज संवारे।।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।

आणि संजीवन प्राण उबारे।।

 

पैठी पताल तोरि जमकारे।

अहिरावण की भुजा उखाड़े।।

.बाएं भुजा असुर दल मारे।

दाहिने भुजा संतजन तारे।।

 

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे।

जै जै जै हनुमान उचारे।।

.कंचन थार कपूर लौ छाई।

आरती करत अंजना माई।।

 

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई।

तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।

जो हनुमानजी की आरती गावै।

बसी बैकुंठ परमपद पावै।।

 

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