जितिया व्रत का पारण कैसे और कब करें, जानिए शुभ मुहूर्त और नियम

Published : Sep 14, 2025, 12:38 PM IST
जितिया व्रत का पारण

सार

Jitiya Vrat 2025 Date: जितिया व्रत 14 सितंबर को मनाया जाएगा। यह निर्जला व्रत संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। व्रती महिलाओं को शुभ मुहूर्त में जिउतिया धागा धारण करना चाहिए और क्रोध, तामसिक भोजन और भूल-चूक से बचना चाहिए

Jitiya Vrat 2025 Paran Time: जितिया व्रत, जिसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है, माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस बार यह व्रत 14 सितंबर 2025 को रखा जा रहा है और अगले दिन यानी 15 सितंबर 2025 को रखा जाएगा। यह व्रत निर्जला रखा जाता है, जिसमें महिलाएं दिन-रात बिना अन्न-जल ग्रहण किए रहती हैं। ऐसे में व्रत के पारण का समय और उसकी विधि बहुत मायने रखती है। आइए जानते हैं जितिया व्रत के पारण का शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।

जितिया व्रत के पारण का समय क्या है?

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष जितिया व्रत का पारण 15 सितंबर 2025 को प्रातःकाल किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 6:30 बजे से 8:32 बजे तक है। इस समयावधि में व्रत पारण करना सर्वोत्तम होता है।

जितिया व्रत पारण की सही विधि?

  • व्रत पारण करते समय कुछ नियमों का पालन करना बहुत ज़रूरी है। इससे न केवल व्रत सफल होता है, बल्कि उसका पूरा फल भी मिलता है।
  • प्रातः स्नान: व्रत पारण करने से पहले, सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ़ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा: व्रत पारण करने से पहले, भगवान जीमूतवाहन की पूजा करें। उन्हें प्रसाद चढ़ाएँ और व्रत सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए उनका धन्यवाद करें।
  • व्रत पारण की विधि: व्रत पारण करने के लिए सबसे पहले फल और जल ग्रहण करें। इसके बाद ही कोई अन्य भोजन ग्रहण करें।
  • पारंपरिक भोजन: जितिया व्रत पारण में कुछ विशेष प्रकार के भोजन का सेवन किया जाता है। इनमें अरवी, तुरई, खीरा, नोनी साग, मंडुआ और देसी मटर शामिल हैं। ये सभी चीज़ें व्रत खोलने के लिए शुभ मानी जाती हैं।
  • सात्विक भोजन: व्रत खोलने के दिन केवल सात्विक भोजन ही करें। लहसुन और प्याज से बने खाद्य पदार्थों से दूर रहें।

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जितिया व्रत क्यों खास है?

जितिया व्रत की शुरुआत 'जीमूतवाहन' की पूजा से होती है। यह व्रत संतान के सुखी और स्वस्थ जीवन के लिए किया जाता है। इस व्रत को करने वाली माताओं को जीमूतवाहन की कथा सुनने से व्रत का फल प्राप्त होता है। यह व्रत उत्तर भारत और खासकर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह खास दिन माताओं के अपने बच्चों के प्रति प्रेम, समर्पण और स्नेह को दर्शाता है।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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