
Gudi Padwa Traditions: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नववर्ष शुरू होता है। हिंदू नव वर्ष देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न नामों से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में ये पर्व गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। इस बार हिंदू नववर्ष 9 अप्रैल, मंगलवार से शुरू होगा, इसलिए गुड़ी पड़वा पर्व भी इसी दिन मनाया जाएगा। इस पर्व से कईं परंपराएं जुड़ी हुई हैं, जो इसे और भी खास बनाती हैं। आगे जानिए इन परंपराओं के बारे में…
गुड़ी पड़वा पर करते हैं ये खास पूजा
गुड़ी पड़वा पर महाराष्ट्रीय परिवारों में एक खास पूजा की जाती है। इस दिन 4 से 5 फीट लंबे डंडे के ऊपर एक लोटा उल्टा रखकर इसके ऊपर आंख, नाक, कान व मुंह की आकृति बनाते हैं। बाद में इस पर रेशमी वस्त्र जिसे सोला कहते हैं और हार-फूल पहनाकर इसकी पूजा की जाती है, इसे ही गुड़ी कहते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से साल भर घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
गुड़ी पड़वा पर क्यों खाते हैं नीम-मिश्री?
गुड़ी पड़वा पर सुबह-सुबह नीम-मिश्री खाने की परंपरा है। इस परंपरा के पीछे वैज्ञानिक तथ्य छिपा है। आयुर्वेद के अनुसार, शीत ऋतु की समाप्ति और ग्रीष्म ऋतु के संधिकाल पर शरीर में कई तरह की रोग होने की संभावना रहती है। इस समय नीम की पत्तियां खाने से शरीर निरोगी बना रहता है और रक्त भी शुद्ध होता है।
पूरन पोली के बिना अधूरा ये त्योहार
गुड़ी पड़वा पर पूरन पोली खास तौर पर बनाई जाती है। इसके बिना गुड़ी पड़वा का पर्व अधूरा माना जाता है। पूरन पोली एक मीठी रोटी होती है, जो चने की दाल से बनाई जाती है और शुद्ध घी से इसे सेका जाता है। मौसम परिवर्तन के कारण शरीर में बीमारियों से लड़ने की इन्युनिटी बनी रहे, इसलिए इस तरह का पौष्टिक भोजन इस समय किया जाता है।
ये भी पढ़ें-
हिंदू नववर्ष 2081 के पहले दिन करें ये 5 उपाय, घर आएगी सुख-समृद्धि
Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
पूजा व्रत कथा: Read everthing about Puja Vrat Katha, Puja Vrat Muhurat, tyohar and puja vidhi for Hindu festivals at Asianet news hindi