
Labh Panchami 2025 Details: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर लाभ पंचमी का पर्व मनाया जाता है। गुजरात में इसकी विशेष मान्यता है क्योंकि इसी दिन से वहां व्यापारिक नववर्ष की शुरूआत मानी जाती है। इस दिन व्यापारी देवी लक्ष्मी के साथ अपने बही खातों की भी पूजा करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उनके बिजनेस में तरक्की होती है। इस सौभाग्य पंचमी और ज्ञान पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। ये पर्व सौभाग्य, धन और ज्ञान से संबंधित है। आगे जानिए इस बार कब है लाभ पंचमी, कैसे करें देवी लक्ष्मी की पूजा और शुभ मुहूर्त की डिटेल…
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पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 26 अक्टूबर, रविवार की तड़के 03 बजकर 48 मिनिट से शुरू होगी, जो 28 अक्टूबर, मंगलवार की सुबह 06 बजकर 05 मिनट तक रहेगी। चूंकि पंचमी तिथि का सूर्योदय 26 अक्टूबर को होगा, इसलिए इसी दिन ये पर्व मनाया जाएगा।
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सुबह 06:29 से 10:13 तक (श्रेष्ठ मुहूर्त)
सुबह 09:21 से 10:46 तक
दोपहर 11:48 से 12:33 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 01:35 से 02:59 तक
- लाभ पंचमी पर शुभ मुहूर्त में किसी साफ स्थान पर देवी लक्ष्मी का चित्र या मूर्ति एक आसान पर स्थापित करें।
- पास में बही खाते व हिसाब-किताब की अन्य पुस्तकें भी रख दें। सबसे पहले देवी लक्ष्मी के चित्र पर तिलक लगाएं।
- इसके बाद फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक लगाएं। देवी लक्ष्मी को प्रणाम कर मनोकामना कहें।
- इसके बाद पूजा स्थान पर रखें बही खातों पर स्वस्तिक बनाकर इनकी भी पूजा करें। फूल-चावल आदि भी चढ़ाएं।
- देवी लक्ष्मी को अबीर, गुलाल, रोली आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाते रहें। मन में लक्ष्मी मंत्र का जाप भी करते रहें।
- इस तरह देवी लक्ष्मी और बही खातों की पूजा करने के बाद कपूर से आरती करें। सुख-समृद्धि की कामना करें।
ऊं जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसिदिन सेवत हर विष्णु-धाता।। ऊं।।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।। ऊं...।।
दुर्गारूप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, रिद्धि-सिद्धि धन पाता।। ऊं...।।
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधिकी त्राता।। ऊं...।।
जिस घर तुम रहती, तहँ सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहिं घबराता।। ऊं...।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता।
खान-पान का वैभव सब तुमसे आता।। ऊं...।।
शुभ-गुण-मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहिं पाता।। ऊं...।।
महालक्ष्मी(जी) की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।। ऊं...।।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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