Parshuram Jayanti 2023: परशुराम जयंती 22 अप्रैल को, क्यों लिया भगवान विष्णु ने ये अवतार? जानें पूजा विधि व शुभ मुहूर्त

Published : Apr 20, 2023, 05:33 PM IST
parshuram jayanti 2023

सार

Parshuram Jayanti 2023: इस बार परशुराम जयंती का पर्व 22 अप्रैल, शनिवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब धरती पर क्षत्रियों का अत्याचार काफी बढ़ गया तब भगवान विष्णु ने परशुराम का अवतार लेकर क्षत्रियों का नाश किया था। 

उज्जैन. धर्म ग्रंथों के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को परशुराम जयंती का पर्व मनाया जाता है। (Parshuram Jayanti 2023) इस बार ये तिथि 22 अप्रैल, शनिवार को है। परशुराम भगवान विष्णु के 24 में से उन्नीसवें अवतार माने जाते हैं। ये अति क्रोधी थे। इन्होंने 21 बार धरती से क्षत्रियों का विनाश कर दिया था। परशुराम जयंती पर इनकी पूजा विशेष रूप से की जाती है। इनकी पूजा से अच्छी सेहत और लंबी आयु प्राप्त होती है। आगे जानिए परशुराम जयंती पर बनने वाले शुभ योग, मुहूर्त व पूजा विधि के बारे में…

इन शुभ योगों में मनाया जाएगा परशुराम जयंती पर्व (Parshuram Jayanti 2023 Shubh Yog)
22 अप्रैल, शनिवार को ध्वजा, श्रीवत्स, आयुष्मान, सौभाग्य, त्रिपुष्कर, सवार्थसिद्धि और अमृतसिद्धि नाम के 7 शुभ योग रहेंगे। इनके अलावा ग्रहों की स्थिति भी शुभ फल देने वाली बन रही है। इस दिन शनि अपनी स्वराशि कुंभ में, शुक्र स्वराशि वृषभ में, सूर्य उच्च राशि मेष में रहेगा। इतने सारे शुभ योग और ग्रहों की स्थिति में परशुराम जयंती का पर्व मनाया जाएगा।

परशुराम जयंती पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Parshuram Jayanti 2023 Shubh Muhurat)
- सुबह 07:27 से 09:04 तक
- दोपहर 12:20 से 01:58 तक
- दोपहर 01:58 से 03:35 तक
- दोपहर 03:35 से शाम 05:13 पी एम

इस विधि से करें भगवान परशुराम की पूजा (Parshuram Jayanti Puja Vidhi)
- परशुराम जयंती यानी 22 अप्रैल, शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। संभव हो तो पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- घर का कोई हिस्सा अच्छी तरह से साफ करें और वहां पटिया यानी चौकी लगाकर उसके ऊपर भगवान परशुराम का चित्र या मूर्ति स्थापित करें। घर में यदि परशु यानी फरसा हो तो उसकी भी पूजा करें।
- सबसे पहले भगवान परशुराम के चित्र पर हार पहनाएं और कुंकुम से तिलक लगाए। इसके बाद शुद्ध घी का दीपक लगाएं। साथ ही फरसे की भी पूजा करें। अबीर, गुलाल, रोली आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाते रहें।
- पूजा के बाद रुद्राक्ष की माला से नीचे लिखे मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।
ऊं ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो राम: प्रचोदयात्।।
ऊं जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात्।।
- इसके बाद भगवान परशुराम को भोग लगाएं और आरती करें। इस दिन व्रत करने वाले लोगों को किसी तरह का कोई अनाज नहीं खाना चाहिए। फलाहार कर सकते हैं।

भगवान परशुराम की आरती (Aarti of Lord Parshuram)
ॐ जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी।
सुर नर मुनिजन सेवत, श्रीपति अवतारी॥ ॐ जय”
जमदग्नी सुत नर-सिंह, मां रेणुका जाया।
मार्तण्ड भृगु वंशज, त्रिभुवन यश छाया॥ ॐ जय”
कांधे सूत्र जनेऊ, गल रुद्राक्ष माला।
चरण खड़ाऊँ शोभे, तिलक त्रिपुण्ड भाला॥ ॐ
ताम्र श्याम घन केशा, शीश जटा
सुजन हेतु ऋतु मधुमय, दुष्ट दलन आंधी॥ ॐ
मुख रवि तेज विराजत, रक्त वर्ण
दीन-हीन गो विप्रन, रक्षक दिन रैना॥ ॐ
कर शोभित बर परशु, निगमागम
कंध चाप-शर वैष्णव, ब्राह्मण कुल त्राता॥ ॐ
माता पिता तम स्वामी, मीत सखा
मेरी बिरद संभारो, द्वार पड़ा मैं तेरे॥ ॐ
अजर-अमर श्री परशराम की, आरती जो
पूर्णेन्दु शिव साखि, सुख सम्पति पावे॥ ॐ


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