Pradosh Vrat 2026: 1 जनवरी को करें प्रदोष व्रत, जानें विधि, मंत्र और मुहूर्त

Published : Jan 01, 2026, 09:02 AM IST

Pradosh Vrat 2026: साल 2026 के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी को प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। इस दिन गुरुवार होने से ये गुरु प्रदोष कहलाएगा। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस व्रत के प्रभाव से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

PREV
14
किसने किया था सबसे पहला प्रदोष व्रत?

Pradosh Vrat January 2026: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत किए जाते हैं, प्रदोष व्रत भी इनमें से एक है। ये व्रत हर हिंदू महीने ये दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल यानी शाम को की जाती है, इसलिए इसे प्रदोष व्रत कहते हैं। कहते हैं कि सबसे पहला प्रदोष व्रत चंद्रदेव ने किया था। इस बार साल 2026 के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी, गुरुवार को प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। गुरुवार को प्रदोष व्रत होने से ये गुरु प्रदोष कहलाएगा। आगे जानें गुरु प्रदोष व्रत की विधि, मुहूर्त और मंत्र सहित पूरी डिटेल…


ये भी पढ़ें-
Monthly Rashifal January 2026: साल का पहला महीना 5 राशि वालों के लिए रहेगा शुभ

24
1 जनवरी 2026 प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त

1 जनवरी, गुरुवार को पूजा का शुभ मुहूर्त 05 बजकर 35 मिनिट से 08 बजकर 19 मिनिट तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 02 घण्टे 44 मिनट का समय मिलेगा। इस दिन शुभ और शुक्ल नाम के 2 शुभ योग दिन भर रहेंगे, वहीं सूर्य और बुध के धनु राशि में होने से बुधादित्य नाम का राजयोग बनेगा। इन शुभ योगों के चलते इस व्रत का महत्व और भी बढ़ गया है।


ये भी पढ़ें-
Ank Rashifal 2026: बर्थ डेट से जानें किसके लिए कैसा रहेगा नया साल? पढ़ें वार्षिक अंक राशिफल

34
गुरु प्रदोष व्रत-पूजा विधि

- 1 जनवरी, गुरुवार को प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस दिन व्रती (व्रत करने वाला) को दिन भर बिना कुछ खाए-पिए रहना पड़ता है। अगर ऐसा करना संभव न हो तो फल या दूध ले सकते हैं।
- दिन भर किसी की बुराई न करें, क्रोध आदि भी न करें। ऐसा करने से भी व्रत का पूरा फल नहीं मिलता। ऊपर बताए शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें और पूजन सामग्री एकत्रित कर लें।
- मुहूर्त शुरू होने पर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं फिर गाय के दूध से अभिषेक करें। पुन: एक बार शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। शुद्ध घी का दीपक लगाएं। पूजा करते समय ऊं नम: शिवाय का जाप करते रहें।
- शिवलिंग पर एक-एक करके बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, जनेऊ, रोली, अबीर आदि चीजें अर्पित करें। इस तरह पूजा करने के बाद महादेव को भोग लगाएं और विधि-विधान से आरती करें।
- पूजा से बाद सात्विक भोजन करें। प्रदोष व्रत करने से महादेव अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी करते हैं। इस व्रत के शुभ प्रभाव से जीवन में आने वाले संकट स्वत: ही टल जाते हैं।

44
भगवान शिव की आरती (Lord shiva Aarti Lyrics in Hindi)

जय शिव ओंकारा प्रभु हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा
ओम जय शिव ओंकारा प्रभु हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा
एकानन चतुरानन पंचांनन राजे स्वामी पंचांनन राजे
हंसानन गरुड़ासन हंसानन गरुड़ासन
वृषवाहन साजे ओम जय शिव ओंकारा
दो भुज चारु चतुर्भूज दश भुज ते सोहें स्वामी दश भुज ते सोहें
तीनों रूप निरखता तीनों रूप निरखता
त्रिभुवन जन मोहें ओम जय शिव ओंकारा
अक्षमाला बनमाला मुंडमालाधारी स्वामी मुंडमालाधारी
त्रिपुरारी धनसाली चंदन मृदमग चंदा
करमालाधारी ओम जय शिव ओंकारा
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगें स्वामी बाघाम्बर अंगें
सनकादिक ब्रह्मादिक ब्रह्मादिक सनकादिक
भूतादिक संगें ओम जय शिव ओंकारा
करम श्रेष्ठ कमड़ंलू चक्र त्रिशूल धरता स्वामी चक्र त्रिशूल धरता
जगकर्ता जगहर्ता जगकर्ता जगहर्ता
जगपालनकर्ता ओम जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका स्वामी जानत अविवेका
प्रणवाक्षर के मध्यत प्रणवाक्षर के मध्य
ये तीनों एका ओम जय शिव ओंकारा
त्रिगुण स्वामीजी की आरती जो कोई नर गावें स्वामी जो कोई जन गावें
कहत शिवानंद स्वामी कहत शिवानंद स्वामी
मनवांछित फल पावें ओम जय शिव ओंकारा
ओम जय शिव ओंकारा प्रभू जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा
ओम जय शिव ओंकारा प्रभू हर शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

Read more Photos on

Recommended Stories