Putrada Ekadashi: व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये 5 काम, नहीं मिलेगा पूजा का पूरा फल

Published : Aug 02, 2025, 05:07 PM ISTUpdated : Aug 02, 2025, 05:46 PM IST
Putrada Ekadashi Vrat Niyam

सार

Putrada Ekadashi Vrat: पुत्रदा एकादशी का व्रत 5 अगस्त को पड़ने वाला है। इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए रखती हैं। इस दिन कुछ ऐसे काम होते हैं, जिन्हें आपको बिना भी नहीं करना चाहिए। इससे आपको पाप चढ़ सकता है।

Putrada Ekadashi Date: हिंदू पंचांग में कई सारी एकादशी आती हैं, जिनका अलग-अलग महत्व होता है। पुत्रदा एकादशी उन्हीं में से एक है। इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए व्रत रखती है। इस एकदाशी को पवित्र एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन जो भी व्यक्ति व्रत रखता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन कुछ बाते ऐसी होती हैं, जिनका ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। यानी कुछ ऐसा बातें जिन्हें भूलकर भी इस दिन नहीं करना चाहिए।

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पुत्रदा एकादशी व्रत पर भूलकर भी न करें ये काम

⦁ पुत्रदा एकादशी के दिन आपको तामसिक भोजन नहीं खाना, जिसमें मांस, मछली, प्याज और लहसुन आदि शामिल है।

⦁ पुत्रदा एकदाशी वाले दिन किसी की भी बुराई न करें। मन में आ रहे गंदे विचारों को बाहर निकाल देना चाहिए।

⦁ इस दिन दाल और अनाज का सेवन भी भूलकर भी न करें। इस दिन आप फूल, दूध आदि चीजों का सेवन कर सकते हैं।

⦁ इस दिन भूलकर भी तुलसी के पत्तों को न तोड़ें। अगर आपको पूजा के लिए तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल करना है, तो उसे एक दिन पहले ही तोड़े लें।

⦁ पुत्रदा एकादशी वाले दिन आप बाल नहीं कटवाएं। साथ ही नाखून भी आपको इस दिन नहीं काटने चाहिए।

पुत्रदा एकादशी का शुभ मुहूर्त

पूजा का ब्रह्म मुहूर्त-सुबह 4 बजकर 20 मिनट से सुबह 5 बजकर 2 मिनट तक रहने वाला है। वहीं, रवि योग का मुहूर्त सुबह 5 बजकर 45 मिनट से सुबह 11 बजकर 23 मिनट तक रहने वाला है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक रहने वाला है। शाम के वक्त पूजा का शुभ मुहूर्त 7 बजकर 9 मिनट से शाम को 7 बजकर 30 मिनट तक रहने वाला है।

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पुत्रदा एकादशी पूजा की विधि

पुत्रदा एकादशी वाले दिन प्रात: काल स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और फिर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। भगवान विष्णु- माता लक्ष्मी का अभिषेक करें। मां लक्ष्मी को 16 श्रृंगार की चीजें चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर आप देवी-देवता का ध्यान करें। फिर पीले फल, धनिया के पंजीरी, मिठाई आदि का उन्हें भोग लगाएं। पूजा के वक्त मंत्र और पाठ का उच्चारण करें और सभी को प्रसाद बांटें।

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