Rohini Vrat 2025: रोहणी व्रत कब? जानिए किसके लिए और कौन कर सकता है ये व्रत?

Published : Nov 06, 2025, 01:09 PM IST
Rohini Vrat 2025

सार

रोहिणी व्रत जैन धर्म का एक पवित्र व्रत है, जो 7 नवंबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान वासुपूज्य और चंद्रदेव की पूजा की जाती है। महिलाएं अपने परिवार और संतान की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं। जानिए कितने साल तक करना चाहिए ये व्रत? 

Rohini Vrat in 2025: जैन धर्म में रोहिणी व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान वासुपूज्य स्वामी की विशेष पूजा की जाती है। चंद्रमा की भी पूजा की जाती है। इस दिन चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि यह रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, इसलिए इसे "चंद्र पूजा" भी कहा जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, रोहिणी व्रत कल, 7 नवंबर को रखा जाएगा। यह अगहन मास का रोहिणी व्रत है। जैन धर्मावलंबियों के लिए रोहिणी व्रत अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। आइए जानें कि रोहिणी व्रत क्यों रखा जाता है। और इस व्रत को कितने वर्षों तक रखने से विशेष लाभ मिलता है?

रोहिणी व्रत क्यों रखा जाता है?

रोहिणी व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा रखा जाता है। महिलाएं अपने परिवार और बच्चों की भलाई और दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं। इस दिन, महिलाएं अपने परिवार और संतान की खुशहाली और दीर्घायु की कामना करते हुए निर्जल या फलाहार व्रत रखती हैं। यह व्रत हर महीने में एक बार आता है, लेकिन विशेष तिथियों पर इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

कितने वर्षों तक व्रत रखना चाहिए?

रोहिणी व्रत जैन धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है। यह रोहिणी नक्षत्र के दिन रखा जाता है। जैन मान्यता के अनुसार, रोहिणी व्रत रखने से व्यक्ति कर्म बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है। रोहिणी व्रत लगातार 3, 5 या 7 वर्षों तक रखा जाता है। इस व्रत को लगातार तीन, पांच या सात वर्षों तक रखना चाहिए। इसके अलावा, व्रत पारण अनुष्ठान करने के बाद ही पूरा माना जाता है और तभी इसका विशेष लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

रोहिणी व्रत पूजा विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठें और पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। फिर, जल का एक घूंट लें, व्रत का संकल्प लें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें। फिर, भगवान वासुपूज्य की मूर्ति को वेदी पर स्थापित करें। इसके बाद भगवान वासुपूज्य को फल, फूल, धूप, दूर्वा, नैवेद्य आदि अर्पित करें। सूर्यास्त से पहले पूजा समाप्त करें और फलाहार ग्रहण करें। अगले दिन पूजा के बाद अपना व्रत तोड़ें। व्रत वाले दिन गरीबों को दान अवश्य दें।

ये भी पढ़ें- Chanakya Niti: जीवन के 5 राज जो गर्भ से पहले ही तय हो जाते हैं, जानिए क्यों नहीं टलता भाग्य

रोहिणी व्रत 2025 कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, रोहिणी व्रत 7 नवंबर 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में होगा और भगवान वासुपूज्य के साथ चंद्रदेव की विशेष पूजा की जाती है।

जैन धर्म में रोहिणी व्रत का क्या महत्व है?

जैन धर्म में रोहिणी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से कर्म बंधन से मुक्ति, परिवार की सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

रोहिणी व्रत कौन कर सकता है?

यह व्रत मुख्य रूप से जैन महिलाएं करती हैं। वे अपने पति और बच्चों की लंबी आयु और अपने परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं। हालाँकि, पुरुष भी यह व्रत रख सकते हैं।

रोहिणी व्रत कितने वर्षों तक रखना चाहिए?

शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत को लगातार 3, 5 या 7 वर्षों तक करना शुभ माना जाता है। व्रत पूर्ण होने के बाद, पारण विधि के साथ इसे समाप्त करना आवश्यक है।

ये भी पढ़ें- kharmaas 2025 Kab: क्या होता है खरमास, जानिए क्यों नहीं किए जाते इस दौरान शुभ कार्य

रोहिणी व्रत के क्या लाभ हैं?

रोहिणी व्रत करने से संतान की दीर्घायु, परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति सुनिश्चित होती है। यह व्रत मन और आत्मा दोनों को शुद्ध करता है।

रोहिणी व्रत में चंद्रमा की पूजा क्यों की जाती है?

इस दिन चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, जो सौंदर्य, शांति और संतुलन का प्रतीक है। इसलिए इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता आती है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

PREV

पूजा व्रत कथा: Read everthing about Puja Vrat Katha, Puja Vrat Muhurat, tyohar and puja vidhi for Hindu festivals at Asianet news hindi

Read more Articles on

Recommended Stories

Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी व्रत कब? जानें पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर कैसे करें पूजा, कौन-सा मंत्र बोलें? जानें शुभ मुहूर्त