Sakat Chaturthi 2026: 6 या 7 जनवरी, कब करें सकट चौथ व्रत? जानें पूजा विधि, मंत्र और चंद्रोदय का समय

Published : Jan 05, 2026, 10:08 AM IST

Sakat Chaturthi 2026: माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सकट चौथ और तिल चतुर्थी कहते हैं। अनेक धर्म ग्रंथों में इस व्रत का महत्व बताया गया है। इस बार ये व्रत जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में किया जाएगा। जानें कब है सकट चतुर्थी 2026?

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जानें सकट चतुर्थी व्रत का महत्व

Sakat Chaturthi 2026 Kab Hai: धर्म ग्रंथों के अनुसार हर हिंदू महीने के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि को भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया जाता है। इनमें से माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व है। इसे सकट और तिल चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। ये साल में आने वाली 4 सबसे बड़ी चतुर्थी तिथियों में से एक है। इस व्रत में चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। आगे जानिए इस बार कब करें सकट चौथ व्रत, इसकी पूजा विधि, मंत्र आदि की डिटेल…

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कब है सकट चतुर्थी 2026?

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 06 जनवरी की सुबह 08 बजकर 01 मिनिट के शुरू होगी जो 07 जनवरी, बुधवार की सुबह 06 बजकर 52 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का चंद्रोदय 6 जनवरी, मंगलवार को होगा, इसलिए इसी दिन सकट चौथ का व्रत किया जाएगा।


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सकट चौथ 2026 चंद्रोदय का समय

पंचांग के अनुसार इस बार सकट चौथ पर चंद्रोदय रात को लगभग 8 बजकर 54 मिनिट पर होगा। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में भिन्नता आ सकती है। इसके पहले भगवान श्रीगणेश की पूजा कर लें। इस दिन प्रीति, आयुष्मान, आनंद और सर्वार्थसिद्धि नाम के 4 शुभ योग रहेंगे, जिसके चलते इसका महत्व और भी अधिक माना जाएगा।

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इस विधि से करें सकट चतुर्थी व्रत

- 6 जनवरीकी सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर कुछ भी खाए नहीं। ऐसा संभव न हो तो एक समय फलाहार कर सकते हैं।
- दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। किसी के बारे में बुरा न सोचें। किसी पर क्रोध न करें और न ही किसी की चुगली आदि भी करें। दिन भर मन ही मन में श्रीगणेशाय नम: मंत्र का जाप करते रहें।
- शाम को चंद्रोदय से पहले श्रीगणेश की पूजा का समय उत्तम है। इसके लिए घर में किसी साफ स्थान पर एक लकड़ी के पटिए के ऊपर लाल कपड़ा बिछाकर इस पर श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- भगवान श्रीगणेश को कुमकुम से तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं। इसके बाद गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं। अबीर, गुलाल, रोली, जनेऊ, आदि चीजें एक-एक करके श्रीगणेश को अर्पित करें।
- भगवान श्रीगणेश को हल्दी लगी दूर्वा चढ़ाएं। इसके बाद अपनी इच्छा अनुसार फल, मिठाई आदि का भोग भी लगाएं। इसके बाद परिवार सहित विधि-विधान से भगवान श्रीगणेश की आरती करें।
- चंद्रमा उदय हो जाने पर जल से अर्घ्य दें। फूल, चावल आदि चीजें भी चढ़ाएं। इसके बाद स्वयं भोजन करें। ग्रंथों के अनुसार, सकट चौथ का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

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गणेशजी की आरती के लिरिक्स हिंदी में

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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