Sawan Last Somvar Date: धर्म ग्रंथों में सावन सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। सावन 2025 का अंतिम सोमवार शेष है। इस दिन कईं शुभ योग बनेंगे, जिसके चलते इसका महत्व और भी बढ़ गया है। जानें कब है सावन 2025 का अंतिम सोमवार?
Sawan Last Somvar Kab Hai: भगवान शिव की भक्ति के लिए सावन मास बहुत शुभ माना गया है। इस बार सावन मास 11 जुलाई से शुरू हो चुका है जो 9 अगस्त तक रहेगा। इस महीने में आने वाले सोमवार भी बहुत खास होते हैं। इस बार सावन 2025 में 4 सोमवार का संयोग बन रहा है, जिसमें से 3 सोमवार निकल चुके हैं। अब सिर्फ अंतिम सोमवार शेष है। जानें कब है सावन 2025 का चौथा और अंतिम सोमवार…
DID YOU KNOW ?
2026 में कब बनेगा सावन सोमवार का संयोग?
4 अगस्त के बाद सावन सोमवार का संयोग अगले साल बनेगा। साल 2026 में 4 सावन सोमवार रहेंगे, जिनकी डेट इस प्रकार है- 3, 10, 17 और 24 अगस्त।
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कब है सावन 2025 का अंतिम सोमवार?
पंचांग के अनुसार, सावन 2025 का अंतिम सोमवार 4 अगस्त को है। इस दिन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रहेगी। इस तिथि के स्वामी स्वयं यमराज हैं। यानी 4 अगस्त को शिवजी की पूजा से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिल सकती है। इस दिन ब्रह्म, इंद्र, मानस, पद्म और सर्वार्थसिद्धि नाम के 5 शुभ योग बनेंगे। इतने सारे शुभ योगों के चलते इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।
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सावन सोमवार 4 अगस्त 2025 शुभ मुहूर्त
सुबह 06:02 से 07:40 तक सुबह 09:17 से 10:55 तक दोपहर 12:06 से 12:59 तक (अभिजीत मुहूर्त) दोपहर 02:10 से 03:48 तक शाम 05:25 से 07:03 तक
- सावन के अंतिम सोमवार पर यानी 4 अगस्त को ऊपर बताए गए किसी शुभ मुहूर्त में शिवजी पूजा करें। - सबसे पहले महादेव के चित्र पर चंदन से तिलक लगाएं। फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। - अबीर, गुलाल, रोली, चावल, जनेऊ, बिल्व पत्र, धतूरा और आंकड़े के फूल एक-एक महादेव को अर्पित करें। - पूजा के दौरान ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। अपनी इच्छा अनुसार महादेव को भोग लगाएं। - भोग लगाने के बाद भगवान की आरती करें। इस तरह पूजा करने से महादेव की कृपा आप पर बनी रहेगी।
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शिवजी के आरती लिरिक्स हिंदी में
जय शिव ओंकारा ऊं जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ऊं जय शिव…॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे । हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ऊं जय शिव…॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ऊं जय शिव…॥ अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी । चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ऊं जय शिव…॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे । सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ऊं जय शिव…॥ कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता । जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ऊं जय शिव…॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ऊं जय शिव…॥ काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी । नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ऊं जय शिव…॥ त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे । कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ऊं जय शिव…॥
Disclaimer इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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