Published : Jul 31, 2025, 02:45 PM ISTUpdated : Jul 31, 2025, 03:13 PM IST
Radha Asthami Date: जन्माष्टमी के बाद राधा अष्टमी का त्योहार बेहद ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन राधा रानी अवतरित हुई थी। जानें कब मनाया जाएगा ये त्योहार, क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
Radha Ashtami Vrat: राधा रानी के बिना भगवान श्री कृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है। जब-जब श्री कृष्ण का नाम लिया जाता है, तब-तब राधा रानी का जिक्र जरूर होता है। इसी संदर्भ में जन्माष्टमी के बाद राधा अष्टमी का त्योहार भी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर राधा अष्टमी का त्योहार पड़ता है। सनातन शास्त्रों में बताया गया है कि इस तिथि पर राधा रानी धरती पर अवतरित हुई थी, इसीलिए ये दिन राधा अष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस बार ये त्योहार 31 अगस्त 2025 को पड़ रहा है। ऐसे में जानें राधा अष्टमी का शुभ मुहूर्त और उनकी पूजा विधि।
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राधा अष्टमी पर शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के मुताबिक इस बार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 30 अगस्त रात के 10:46 पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 31 अगस्त की देर रात 12: 57 पर होने वाला है। ऐसे में सूर्योदय की तिथि को ध्यान में रखते हुए राधा अष्टमी का त्योहार 31 अगस्त के दिन मनाया जाने वाला है।
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अभिजीत मुहूर्त का बन रहा है संयोग
वहीं, इस बार राधा अष्टमी के दिन अभिजीत मुहूर्त का संयोग बन रहा है। जोकि सुबह 11:24 मिनट से शुरू होगा और दोपहर को 12:15 मिनट तक रहने वाला है। साथ ही अनुराधा नक्षत्र का संयोग भी बनता हुआ नजर आ रहा है।
राधा अष्टमी वाले दिन प्रात:काल उठकर स्नानादि करें। फिर राधा रानी-भगवान कृष्ण जी की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं और मूर्ति का श्रृंगार करें। राधा रानी और कान्हा को भोग अर्पित करें। राधा अष्टमी वाले दिन पूजन के लिए पांच रंग के चूर्ण से मंडप को तैयार करें और इसी के अंदर आप षोडश दल के आकार का एक कमल यंत्र बनाएं। अब कमल के बीच में सुंदर आसन पर भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की मूर्ति को पश्चिम की तरफ मुंह करके स्थापित करें और दोनों भगवान से प्रार्थना करें। बाद में राधा रानी और श्री कृष्ण की पूजा और आरती करें।
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राधा अष्टमी के व्रत नियम
कुछ लोग राधा अष्टमी वाले दिन व्रत रखते हैं। उस दिन कई बातों को ध्यान में रखना जरूरी होता है। इस दिन तामसिक भोजन का सेवन करने से बचें। नकारात्मक ऊर्जा से खुद को दूर रखें। ब्रह्मचर्य का पालन पूरे दिन करें। शुभ मुहूर्त में ही करें व्रत का उद्यापन करें।
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