Janmashtami Special: जन्माष्टमी का त्योहार इस बार 16 अगस्त के दिन पड़ रहा है। पूरी विधि-विधान के साथ श्री कृष्ण की पूजा करने के लिए कई चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, उनमें से एक है खीर। जानिए खीरे के मदद से करवाया जाता है श्री कृष्ण का जन्म।

Janmashtami Puja Vidhi Kheera: जन्माष्टमी का त्योहार जल्दी आने वाला है। ऐसे में अभी से ही बाजारों और मंदिरों में इसकी झलक देखने को मिलने लगी है। इस बार जन्माष्टमी का त्योहार 16 अगस्त के दिन मनाया जाने वाला है। जन्माष्टमी की पूजा में डंठल वाले खीरे का इस्तेमाल किया जाता है, जोकि बेहद अहम होता है। बिना खीरे के इस्तेमाल के जन्माष्टमी की पूजा अधूरी मानी जाती है। ऐसे में यदि आप पहली बार अपने लड्डू गोपाल की पूजा करने जा रहे हैं, तो आपके लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि आखिर क्यों किया जाता है खीरे का जन्माष्टमी की पूजा में इस्तेमाल?

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जन्माष्टमी पर क्यों होता है खीरे का इस्तेमाल?

खीरे का संबंध मां देवकी से जुड़ा बताया गया है। रात के 12 बजे रोहिणी नक्षत्र के संयोग में खीरे को डंठल से अलग किया जाता है और भगवान श्री कृष्ण का जन्म उससे करवाया जाता है। जन्म के वक्त जैसे बच्चे को मां से अलग किया जाता है, वैसे ही लड्डू गोपाल का जन्म खीरे के जरिए होता है।

कैसे करवाएं खीरे से लड्डू गोपाल का जन्म?

जन्माष्टमी वाले दिन एक थाली में डंठल वाला खीरा रखें। उसके बाद सिक्के की सहायता से उस खीरे को बीच में से काटकर लड्डू गोपाल का जन्म करवाएं। इसके बाद शंख बजाएं और भगवान का पंचामृत से अभिषेक करवाएं। साथ ही उन्हें नए वस्त्र पहनाएं। इसके बाद लड्डू गोपाल की पूरी विधि-विधान के साथ पूजा करें। उन्हें भोग के तौर पर मिश्री-माखन, पंजारी आदि अर्पित करें। पूजा करने के बाद प्रसाद सब में बांट दें और अपना व्रत खोले।

जन्माष्टमी पूजा सामग्री

जन्माष्टमी की पूजा के लिए आपको केले के पत्ते पर विराजमान श्री कृष्ण की तस्वीर घर लानी चाहिए। वहीं, पूजा के लिए गुलाब, चावल, लाल कमल, गेंहू और भगवान के खूबसूरत वस्त्र और जेवरात भी खरीदकर रखने चाहिए। पूजा के लिए सबसे पहले आप मंदिर में लाल या फिर सफेद कपड़ा बिछाएं। वहां पर श्री कृष्ण को स्थापित करें।

क्या है जन्माष्टमी व्रत की विधि

जन्माष्मी वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। फिर भगवान श्री कृष्ण को प्रणाम करें। पूरे दिन श्री कृष्ण के साथ-साथ राधा रानी के नाम का जप करें। दिन में आप चाहे तो फल खा सकते हैं। रात को 12 बजे की पूजा से पहले फिर से स्नान करके साफ कपड़े पहने और विधि पूर्वक कान्हा जी की पूजा करें। उनकी आरती उतारकर भोग लगाएं।