
Sheetala Puja 2024 Details: धर्म ग्रंथों में देवी शीतला का वर्णन हैं। ये माता पार्वती का ही एक रूप हैं। हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि पर इनकी पूजा विशेष रूप से की जाती है। देवी शीतला को ठंडा और बासी खाने का भोग लगाया जाता है, इसलिए इस पर्व को बसौड़ा, बसियौरा व बसोरा भी कहते हैं। इस दिन सभी लोग ठंडा और बासी खाना ही खाते हैं। इस पर्व से जुड़ी कई खास परंपराएं और मान्यताएं हैं। आगे जानिए इस बार कब है शीतला सप्तमी और अष्टमी, साथ ही पूजा विधि, मंत्र सहित पूरी डिटेल…
कब है शीतला अष्टमी 2024? (Kab Hai Sheetala Ashtami 2024)
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 अप्रैल, सोमवार की रात 09.10 से 2 अप्रैल, मंगलवार की रात 08.09 मिनिट तक रहेगी। चूंकि अष्टमी तिथि का सूर्योदय 2 अप्रैल को होगा, इसलिए इसी दिन शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। मित्र, परिघ और शिव नाम के 3 शुभ योग बनेंगे।
देवी माता की पूजा विधि (Sheetala Mata Puja Vidhi)
- महिलाएं जिस भी दिन (सप्तमी या अष्टमी) देवी शीतला की पूजा करना चाहती हैं, उसके एक दिन पूजा में चढ़ाने वाली चीजें बनाकर रख लें। अगले दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल और चावल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- अपने समीप स्थित देवी शीतला के मंदिर में जाएं और हाथ जोड़कर प्रणाम करें। इसके बाद एक दिन पहले बनाए गए ठंडे खाद्य पदार्थ, मिठाई, पूआ, पूरी, दाल-भात आदि का भोग लगाएं। इसे बाद पूजा स्थान की 7 परिक्रमा करें।
- ग्रंथों के अनुसार, देवी शीतला ठंडी प्रकृति की देवी हैं। इनकी पूजा में अग्नि तत्व का प्रयोग नहीं किया जाता है इसलिए देवी शीतला की पूजा में दीपक और अगरबत्ती न जलाएं। इसके बाद शीतला माता की कथा सुनें।
- शीतला सप्तमी और अष्टमी पर घरों में गर्म भोजन नहीं बनाया जाता। एक दिन पहले का बनाया हुआ भोजन खाने की परंपरा इस दिन है। मान्यता है कि ऐसा करने से देवी शीतला प्रसन्न होती हैं और घर-परिवार में शीतजन्य रोग नहीं होते।
ये है देवी शीतला की आरती (Devi Sheetala Ki Arti)
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ।
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता ॥
ॐ जय शीतला माता..॥
रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भाता ।
ऋद्धि-सिद्धि चँवर ढुलावें,
जगमग छवि छाता ॥
ॐ जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ।
विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता ।
वेद पुराण वरणत, पार नहीं पाता ॥
ॐ जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ।
इन्द्र मृदङ्ग बजावत, चन्द्र वीणा हाथा ।
सूरज ताल बजावै, नारद मुनि गाता ॥
ॐ जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
घण्टा शङ्ख शहनाई, बाजै मन भाता ।
करै भक्तजन आरती, लखि लखि हर्षाता ॥
ॐ जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
ब्रह्म रूप वरदानी, तुही तीन काल ज्ञाता ।
भक्तन को सुख देती, मातु पिता भ्राता ॥
ॐ जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
जो जन ध्यान लगावे, प्रेम शक्ति पाता ।
सकल मनोरथ पावे, भवनिधि तर जाता ॥
ॐ जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
रोगों से जो पीड़ित कोई, शरण तेरी आता ।
कोढ़ी पावे निर्मल काया, अन्ध नेत्र पाता ॥
ॐ जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
बांझ पुत्र को पावे, दारिद्र कट जाता ।
ताको भजै जो नाहीं, सिर धुनि पछताता ॥
ॐ जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
शीतल करती जननी, तू ही है जग त्राता ।
उत्पत्ति व्याधि बिनाशन, तू सब की घाता ॥
ॐ जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता ।
दास विचित्र कर जोड़े, सुन मेरी माता ।
भक्ति आपनी दीजै, और न कुछ भाता ॥
जय शीतला माता,
मैया जय शीतला माता ।
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता ॥
ॐ जय शीतला माता..॥
ये है शीतला माता की कथा (Sheetala Mata Ki Katha)
मान्यता है कि, किसी समय एक गांव में गरीब महिला रहती थी। वह माता शीतला की भक्त थी, लेकिन उस गांव में कोई भी देवी शीतला की पूजा नहीं करता था। एक दिन किसी कारण से उस गांव में आग लग गई, जिसमें सभी गांव वालों को काफी नुकसान हुआ, लेकिन उस महिला का कुछ नहीं बिगड़ा। लोगों ने जब उस महिला से इसका कारण पूछा तो उसने बताया कि ‘मैं माता शीतला की भक्त हूं और रोज उनकी पूजा करती हूं। इसलिए मेरा घर आग से सुरक्षित है।’ महिला की बात सुनकर सभी लोग शीतला माता की पूजा करने लगे।
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