
Varad Chaturthi 2025 Kab Hai: धर्म ग्रंथों के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को वरद चतुर्थी कहते हैं। इसका एक और नाम तिलकुंद चतुर्थी भी है। इस दिन महिलाएं भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत करती हैं और शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद ही भोजन करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आगे जानिए इस बार कब है वरद चतुर्थी…
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पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 01 फरवरी, शनिवार की सुबह 11 बजकर 38 मिनिट से शुरू होगा, जो 02 फरवरी, रविवार की सुबह 09 बजकर 14 मिनिट तक रहेगा। चूंकि चंद्रमा तिथि का चंद्रोदय 1 फरवरी को होगा, इसलिए इसी दिन वरद चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। इस दिन परिघ और शिव नाम के 2 शुभ योग रहेंगे, जिसके चलते इसका महत्व और भी बढ़ गया है।
- सुबह 11:38 से दोपहर 01:40 तक (श्रेष्ठ मुहूर्त)
- दोपहर 12:18 से 01:02 (अभिजीत मुहूर्त)
- दोपहर 03:25 से 04:47 तक
- 1 फरवरी, शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल और चावल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर कुछ भी खाए-पिएं नहीं। अगर ऐसा संभव न हो तो फलाहार ले सकते हैं।
- शुभ मुहूर्त में एक चौकी पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। भगवान को हार पहनाएं, कुमकुम का तिलक लगाएं। एक-एक करके फल, फूल, चावल, रौली, मौली चढ़ाएं।
- पूजा के दौरान ऊं गं गणपत्यै नम: मंत्र का जाप करें। अंत में तिल-गुड़ से बनी मिठाइ का भोग लगाएं। इसके बाद आरती के बाद प्रसाद सभी लोगों में बांट दें। इस व्रत से आपके घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी।
1. वरद चतुर्थी पर तिल से बनी चीजों जैसे लड्डू, गजक व रेवड़ी का दान करने का विशेष महत्व है। या काम जरूर करें।
2. वरद चतुर्थी पर गरीबों को ऊनी कपड़े, कंबल और भोजन का दान करें।
3. किसी ब्राह्मण को हरे मूंग का दान करें। इससे बुध ग्रह से शुभ फल मिलते हैं।
4. कर्ज से छुटकारा पाने के लिए ऋणहर्ता गणपति स्त्रोत का पाठ करें।
5. हाथी को हरा चारा खिलाएं या उसके निमित्त पैसा किसी मंदिर में दान करें।
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