
Kab Hai Vighnaraja Sankashti Chaturthi 2025: धर्म ग्रंथों के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाता है। हर महीने की संकष्टी चतुर्थी का एक विशेष नाम होता है। आश्विन मास की संकष्टी चतुर्थी को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है और रात को चंद्रमा की पूजा करने के बाद ही ये व्रत पूर्ण होता है। आगे जानिए साल 2025 में कब है विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी, इसकी पूजा विधि, मंत्र आदि की डिटेल…
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पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 10 सितंबर, बुधवार की दोपहर 03 बजकर 38 मिनिट से शुरू होगी, जो 11 सितंबर, गुरुवार को दोपहर 12 बजकर 45 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का चंद्रोदय 10 सितंबर को उदय होगा, इसलिए इसी दिन विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा।
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पंचांग के अनुसार, 10 सितंबर, बुधवार को चंद्रोदय रात 08 बजकर 06 मिनिट पर होगा। अलग-अलग स्थानों पर चंद्रोदय के समय में आंशिक परिवर्तन आ सकता है। चंद्रोदय के पहले भगवान श्रीगणेश की पूजा कर लें और चंद्रमा के उदय होने पर अर्घ्य दें अपना व्रत पूर्ण करें।
- 10 सितंबर, बुधवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने से बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। आप चाहे तो निर्जला उपवास कर सकते हैं या एक समय फलाहार कर सकते हैं।
- चंद्रोदय यानी रात 08:06 से पहले घर में किसी साफ स्थान पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजन करें। श्रीगणेश की प्रतिमा पर तिलक लगाएं, माला पहनाएं। शुद्ध घी का दीपक भी जरूर जलाएं।
- श्रीगणेश को अबीर, गुलाल, चावल, रोली, फूल, पान, वस्त्र, जनेऊ, दूर्वा आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाएं। पूजा करते समय ऊं गं गणपतये नम: मंत्र का जाप करें। लड्डू का भोग लगाएं और आरती करें।
- रात को जब चंद्रमा उदय हो तो जल से अर्ध्य दें और फूल-चावल आदि चीजें चढ़ाएं। इसके बाद स्वयं भोजन करें। इस प्रकार संकष्टी चतुर्थी का व्रत-पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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