मार्च 2025 में कब करें विनायकी चतुर्थी व्रत? जानें पूजा विधि, मुहूर्त और मंत्र

Published : Mar 01, 2025, 11:34 AM IST
vinayki ganesh chaturthi 2025

सार

Vinayak Chaturthi march 2025: भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए हर महीने विनायकी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इस दिन चंद्रमा के दर्शन और पूजा की परंपरा भी ह। जानें मार्च 2025 में कब किया जाएगा विनायकी चतुर्थी व्रत? 

Kab Hai Vinayaka Chaturthi march 2025: हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायकी चतुर्थी व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। जानें मार्च 2025 में कब करें विनायकी चतुर्थी व्रत, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त आदि पूरी डिटेल…

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कब है फाल्गुन मास की विनायकी चतुर्थी?

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 02 मार्च, रविवार की रात 09 बजकर 02 मिनिट से 03 मार्च, सोमवार की शाम 06 बजकर 02 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय 3 मार्च को होगा, इसलिए इस दिन फाल्गुन मास की विनायकी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा।

ये हैं फाल्गुन विनायकी चतुर्थी के शुभ मुहूर्त (Vinayaka Chaturthi march 2025 Shubh Muhurat)

- सुबह 09:44 से 11:11 तक
- दोपहर 02:05 से 03:32 तक
- शाम 04:59 से 06:27 तक
- शाम 06:27 से 07:59 तक

इस विधि से करें विनायकी चतुर्थी व्रत-पूजा (Vinayaki Chaturthi Puja Vidhi)

- 3 मार्च, सोमवार की सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि करने के बाद मन में व्रत-पूजा का संकल्प लें। ऊपर बताए किसी शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा या चित्र एक बाजोट पर स्थापित करें।
- सबसे पहले गणेश प्रतिमा पर तिलक लगाएं और फूलों की माला पहनाएं। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। दूर्वा, अबीर, गुलाल, रोली आदि चीजें भी श्रीगणेश को चढ़ाएं। पूजा के दौरान ऊं गं गणपतयै नम: मंत्र का जाप करें।
- अपनी इच्छा के अनुसार भगवान श्रीगणेश को भोग लगाएं और आरती करें। दिन में एक समय फलहार करें। शाम को चंद्रमा निकलने पर दर्शन और पूजन करें। इसके बाद ही अपना व्रत पूर्ण करें।
- धर्म ग्रंथों के अनुसार, जो व्यक्ति विनायकी चतुर्थी का व्रत करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और परिवार में भी सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

भगवान श्रीगणेश की आरती (Lord Ganesha Aarti)

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों व विद्वानों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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