
Rishi Panchami Vrat Importance: हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है। ये व्रत सिर्फ वहीं महिलाएं करती हैं जो रजस्वला होती हैं यानी जिनके पीरियड आते हैं। धर्म ग्रंथों में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का संयोग 2 दिन बन रहा है जिसके चलते ये व्रत किस दिन किया जाए, इसे लेकर संशय की स्थिति बन रही है। आगे जानिए ऋषि पंचमी व्रत की सही डेट, महत्व व अन्य बातें…
पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 15 सितंबर, मंगलवार की सुबह 07 बजकर 44 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन 16 सितंबर, बुधवार की सुबह 08 बजकर 59 मिनिट तक रहेगी। ऋषि पंचमी की पूजा दोपहर में करने की परंपरा है और ये स्थिति 15 सितंबर को बन रही है, इसलिए इसलिए इसी दिन यानी 15 सितंबर, मंगलवार को ही ये व्रत किया जाएगा।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं से अनजाने में कुछ ऐसे काम हो सकते हैं, जिन्हें शास्त्रों में दोष या पाप माना गया है। इन दोषों से मुक्ति और प्रायश्चित के लिए ऋषि पंचमी का व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से मासिक धर्म से जुड़े दोषों का प्रायश्चित हो जाता है। इसी वजह से परंपरा में ऋषि पंचमी का व्रत खास तौर पर मासिक धर्म वाली महिलाओं के लिए बताया गया है।
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ऋषि पंचमी के दिन महिलाएं सप्त ऋषियों की पूजा करती हैं। हिंदू धर्म में इन सात ऋषियों को बहुत पूजनीय माना गया है। सप्त ऋषियों के नाम वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज बताए गए हैं। मान्यता है कि ऋषि पंचमी पर इन सप्त ऋषियों की विधि-विधान से पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए दोषों का प्रायश्चित होता है। इस व्रत में खान-पान को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं। मान्यता के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाएं इस दिन अनाज और फल का सेवन नहीं करती हैं।
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