Rishi Panchami 2026: क्यों करते हैं ऋषि पंचमी व्रत? जानें पूजा विधि, मंत्र, शुभ मुहूर्त सहित पूरी डिटेल

Published : Sep 14, 2026, 03:00 PM IST
Rishi Panchami 2026

सार

Rishi Panchami 2026 Kab Hai: इस साल ऋषि पंचमी का व्रत 15 सितंबर 2026, मंगलवार को किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार महिलाओं के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।

Rishi Panchami Puja Vidhi: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का व्रत किया जाता है। इस दिन सप्त ऋषियों की पूजा करने की परंपरा है। ये व्रत सिर्फ वहीं महिलाएं करती हैं जो रजस्वला होती हैं यानी जिसके पीरियड आते हैं। इस व्रत से रजस्वला काल के दौरान जाने-अनजाने में हुई गलतियों के दोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत करने से सुख-शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है। पूजा के साथ ऋषि पंचमी की व्रत कथा सुनना भी शुभ माना जाता है।

ऋषि पंचमी 2026 पूजा शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार ऋषि पंचमी व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 02 मिनिट से शुरू होगा, जो दोपहर 01 बजकर 30 मिनिट तक रहेगा। यानी पूजा के लिए महिलाओं को पूरे 02 घण्टे 28 मिनट का समय मिलेगा।

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ऋषि पंचमी व्रत-पूजा विधि

- ऋषि पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। धार्मिक परंपरा के अनुसार इस दिन अपामार्ग यानी आंधीझाड़ा नाम की वनस्पति से दांत साफ करने और इसे सिर पर रखकर स्नान करने की मान्यता है।

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- इसके बाद पूजा के लिए घर में किसी साफ जगह को अच्छी तरह साफ करें। शुभ समय में मिट्टी या तांबे का कलश स्थापित करें और उसे कपड़े से ढक दें। इसके ऊपर मिट्टी के दीपक में जौ भरकर रखें। इसके बाद विधि-विधान से सप्त ऋषियों की पूजा करें।
- पूजा का संकल्प लेते समय अपना नाम और गोत्र बोलकर यह मंत्र पढ़ें-
“अमुक गोत्रा, अमुक देवी, अहं मम आत्मनो रजस्वलावस्थायां गृहभाण्डादिस्पर्शदोषपरिहारार्थं अरुन्धतीसहितसप्तर्षिपूजनं करिष्ये।”
- इसके बाद कलश में सप्त ऋषियों का निवास मानकर पूजा करें। कलश पर अबीर, गुलाल, अक्षत, जनेऊ, सुपारी, फूल आदि पूजा सामग्री अर्पित करें। पूजा पूरी होने के बाद कलश किसी ब्राह्मण को दान करने और अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा देने की परंपरा है।
- ऋषि पंचमी के व्रत में हल से जुते खेत का अनाज खाने की मनाही बताई गई है। व्रत के दौरान इस नियम का ध्यान रखना चाहिए।

ऋषि पंचमी की आरती हिंदी में

श्री हरि हर गुरु गणपति, सबहु धरि ध्यान।
मुनि मंडल श्रृंगार युक्त, श्री गौतम करहुँ बखान।
ऊं जय गौतम त्राता, स्वामी जी गौतम त्राता।
ऋषिवर पूज्य हमारे, मुद मंगल दाता।।
द्विज कुल कमल दिवाकर, परम न्यायकारी।
जग कल्याण करन हित, न्याय रच्यो भारी।।
ऊं जय गौतम त्राता…
पिप्लाद सुत शिष्य आपके, सब आदर्श भये।
वेद शास्त्र दर्शन में, पूर्ण कुशल हुए।।
ऊं जय गौतम त्राता…
गुर्जर करण नरेश विनय पर, तुम पुष्कर आए।
सभी शिष्य सुतगण को, अपने संग लाए।।
ऊं जय गौतम त्राता…
अनावृष्टि के कारण, संकट आन पड़्यो।
भगवान आप दया करी, सबको कष्ट हरयो।।
ऊं जय गौतम त्राता…
पुत्र प्राप्ति हेतु, भूप ने यज्ञ कियो।
यज्ञ देव के आशीष से, सुत को जन्म भयो।।
ऊं जय गौतम त्राता…
भूप मनोरथ पूर्ण करके, चिंता दूर करी।
प्रेतराज पामर की, निर्मल देह करी।।
ऊं जय गौतम त्राता…
ऋषिवर अक्षपाद की आरती, जो कोई नर गावे।
ऋषि की पूर्ण कृपा से, मनवांछित फल पावे।।
ऊं जय गौतम त्राता...


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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