Unique Temple: कहां है ‘सखी हनुमान मंदिर’? जहां स्त्री रूप में होती है बजरंगबली की पूजा

Published : Jan 09, 2026, 03:25 PM ISTUpdated : Jan 09, 2026, 03:27 PM IST
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सार

Unique Temple: देश भर में हनुमानजी के अनेक मंदिर हैं। इन मंदिरों में हनुमानजी के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। झांसी में एक मंदिर में हनुमानजी की पूजा स्त्री रूप में की जाती है। यहां देवी की तरह हनुमानजी का श्रृंगार किया जाता है।

Sakhi Hanuman Temple Jhansi: हनुमानजी को शक्ति का देवता कहा जाता है। इनके अनेक रूप भी हैं जैसे संकट मोचन, बाल हनुमान, वीर हनुमान और पचंमुखी आदि। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उत्तर प्रदेश के झांसी में एक प्राचीन मंदिर हैं जहां हनुमानजी का श्रृंगार एक देवी के रूप में किया जाता है। दूर-दूर से भक्त इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं और हनुमानजी के इस रूप को देखकर आश्चर्य से भर जाते हैं। इस मंदिर की कथा भी बहुत रोचक है। आगे जानिए इस मंदिर से जुड़ी रोचक बातें…

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सखी हनुमान के नाम से प्रसिद्ध है ये मंदिर

हनुमानजी का ये अनोखा मंदिर सखी हनुमान के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर झांसी-कानपुर हाईवे रोड के पास स्थित है। इस मंदिर को काफी रहस्यमयी माना जाता है। लोगों का ये भी कहना है कि यहां जो भी इच्छा मांगो वह जरूर पूरी होती है। यही कारण है दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने आते हैं। नि:संतान दंपत्ति को यहां दर्शन करने से संतान प्राप्ति होती है, ऐसी भी मान्यता है।

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क्या है सखी हनुमान मंदिर का इतिहास?

स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग 500 साल पहले ओरछा में सखी बाबा नाम के एक दिव्य संत रहते थे। एक बार रात में उन्हें हनुमानजी ने स्त्री रूप में दर्शन दिए और यहां कहा कि उनके इस रूप से किसी विशेष स्थान पर स्थापित कर पूजन किया जाए। सखी बाबा ने हनुमानजी के इस अनोखे रूप में स्थापित करने के लिए झांसी को चुना और सखी हनुमान मंदिर की नींव रखी। तभी से यहां स्त्री रूप में ही हनुमानजी की पूजा की जा रही है।

हनुमानजी ने कब लिया स्त्री रूप?

वाल्मीकि या अन्य किसी रामायण में हनुमानजी के स्त्री रूप का वर्णन मिलता, सिर्फ आनंद रामायण में मिलता है। उसके अनुसार जब हनुमानजी ने लंका में जाकर सीता माता की खोज को तो स्त्री रूप धारण किया था। आनंद रामायण में इस चौपाई में हनुमानजी के स्त्री रूप का वर्णन मिलता है- ‘चारुशिला नामक सखी सदा रहत सिय संग, इत दासी उत दास हैं, त्रिया तन्य बजरंग।’ यानी हनुमान जी ने चारुशिला नामक सखी बनकर देवी सीता की सेवा की थी।


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