
संतान सप्तमी का व्रत 17 और 18 सितंबर को रखा जा रहा है। महिलाएं ये व्रत संतान की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना के लिए रखती हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाए जाने वाले इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर पूजा के बाद हाथ में कलावा या डोरा बांधने की परंपरा भी है। कलवा के साथ 7 गांठे भी बांधी जाती हैं, जिसका विशेष महत्व होता है। वैदिक ज्योतिषी और आध्यात्मिक कोच भूमिका ने इसके विशेष महत्व के बारे में बताया है।
संतान सप्तमी पर डोरे में सात गांठ लगाने की परंपरा स्थानीय मान्यताओं के अनुसार देखने को मिलती है। धार्मिक दृष्टि से ‘सात’ संख्या को शुभ और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से सात गांठों वाले डोरे को संतान की रक्षा और परिवार की मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है। गांठ को संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु, सुख, समृद्धि और जीवन में आने वाली बाधाओं से रक्षा की प्रार्थना का प्रतीक के रूप में देखा जाता है। जाने 7 गांठों के लाख के बारे में।
संतान सप्तमी में सिर्फ 7 गांठ वाले धागे ही नहीं बल्कि 7 मीठी पूड़ियां बनाकर भगवान को भोग लगाने की परंपरा भी है। इन्हें केले के पत्ते में बांधकर पूजा स्थान पर रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि संतान की रक्षा व उन्नति के लिए यह जरूरी विधि है।
संतान सप्तमी के दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और संतान के कल्याण की प्रार्थना करती हैं। देश के विभिन्न भागों में पूजा के दौरान अलग विधियां अपनाई जा सकती हैं। अपने अपने घर परिवार में होने वाली पूजा विधि का पालन करें।
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