Santan Saptami Ki Vrat Katha: संतान सप्तमी की पौराणिक कथा पढ़ें, जिसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण और माता देवकी से माना जाता है। जानें व्रत का महत्व, कथा और पूजा से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।

हिंदू धर्म में संतान सप्तमी का व्रत का बहुत महत्व है। इस साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि यानी 17 सितंबर को ये व्रत किया जाएगा। संतान सप्तमी व्रत करने से संतान की सुख-समृद्धि, आरोग्य और दीर्घायु होती है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाए जाने वाले इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस व्रत की एक प्रमुख मान्यता भगवान श्रीकृष्ण और उनकी माता देवकी से भी जुड़ी है। आइए जानते हैं कि संतान सप्तमी व्रत कथा क्या है?

युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा था व्रत का महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार पांडव पुत्र युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से ऐसे व्रत के बारे में पूछा, जिससे संतान संबंधी कष्ट दूर हों और परिवार में संतान सुख बना रहे। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें संतान सप्तमी व्रत का महत्व बताया। कथा में बताया जाता है कि इस व्रत की परंपरा भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से जुड़ी है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा करके संतान के मंगल की प्रार्थना करते हैं।

देवकी और संतान सप्तमी व्रत का संबंध क्या है?

लोकप्रिय संतान सप्तमी व्रत-कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से पहले देवकी और वसुदेव को अपने बच्चों को लेकर बहुत दुख सहना पड़ा था। ऐसी मान्यता है कि लोमश ऋषि ने देवकी को संतान सप्तमी व्रत करने की सलाह दी थी। ऋषि ने उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करने तथा व्रत के नियमों का पालन करने के लिए कहा। देवकी ने ऋषि की बात मानकर व्रत किया। बाद में उनके घर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। इसी वजह से इस व्रत को श्रीकृष्ण से जोड़कर भी देखा जाता है।

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श्रीकृष्ण ने खुद सुनाई थी व्रत की कथा

व्रत-कथा की परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को संतान सप्तमी के महत्व के बारे में बताने का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने बताया कि उनकी माता देवकी ने भी इस व्रत का पालन किया था। इसलिए संतान सप्तमी को माता-पिता और संतान के पवित्र रिश्ते से जोड़कर देखा जाता है।

संतान सप्तमी कथा से जुड़ी धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संतान सप्तमी का व्रत श्रद्धा से करने और कथा सुनने से संतान पर भगवान शिव-पार्वती की कृपा बनी रहती है। लेकिन ये केवल मान्यता है।

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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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