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Ashtavinayak: कहीं दिए भक्तों को दर्शन, कहीं किया राक्षस का वध, जानें महाराष्ट्र के अष्टविनायक के रोचक फैक्ट्स

Ganesh Chaturthi 2026: इस बार गणेश उत्सव की शुरूआत 14 सितंबर से हो चुकी है। इन 10 दिनों में प्रमुख गणेश मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। महाराष्ट्र के अष्ट विनायक भी प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में शामिल हैं।

4 Min read
Author : Manish Meharele
Published : Sep 15 2026, 02:17 PM IST
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बहुत प्रसिद्ध हैं महाराष्ट्र के ये 8 गणेश मंदिर
Image Credit : Gemini

बहुत प्रसिद्ध हैं महाराष्ट्र के ये 8 गणेश मंदिर

Ashtavinayak Yatra: महाराष्ट्र को भगवान गणेश की भक्ति के लिए खास तौर पर जाना जाता है। यहां गणपति के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन अष्टविनायक यात्रा का अपना अलग धार्मिक महत्व है। अष्टविनायक का मतलब भगवान गणेश के आठ प्रमुख स्वरूपों से है। महाराष्ट्र में स्थित इन आठ मंदिरों को एक पारंपरिक क्रम में दर्शन करने की मान्यता है। इन मंदिरों को लेकर अलग-अलग धार्मिक कथाएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं। आगे जानिए अष्ट विनायक से जुड़ी रोचक बातें…

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मयूरेश्वर गणपति
Image Credit : Social Media

मयूरेश्वर गणपति

अष्टविनायक में सबसे पहले आते हैं मयूरेश्वर, इन्हें मोरेश्वर भी कहते हैं। ये मोरगांव में स्थित हैं। यहां भगवान गणेश को मयूरेश्वर के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इसी स्थान पर गणेशजी ने मोर पर सवार होकर सिंधुरासुर नामक राक्षस का वध किया गया था। तभी से ये स्थान मयूरेश्वर विनायक के रूप में प्रसिद्ध है। यहां भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा बैठी मुद्रा में हैं। ये प्रतिमा चारभुजी और तीन नेत्रों वाली है। ऐसी गणेश प्रतिमा बहुत कम देखने को मिलती है।

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सिद्धिविनायक गणेश
Image Credit : Social Media

सिद्धिविनायक गणेश

अष्ट विनायक में दूसरा मंदिर सिद्धटेक में स्थित सिद्धिविनायक का है। यह मंदिर भीमा नदी के किनारे स्थित है। मंदिर के वर्तमान में जो गर्भगृह है, उसका निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। मान्यता है कि मधु व कैटभ दैत्यों से युद्ध में विजय पाने के लिए भगवान विष्णु ने इसी सिद्धक्षेत्र में गणपति जी की आराधना की थी।.


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बल्लालेश्वर गणपति
Image Credit : Social Media

बल्लालेश्वर गणपति

अष्ट विनायक में तीसरा है पाली का बल्लालेश्वर मंदिर। अष्टविनायक के बाकी मंदिरों के मुकाबले यह मंदिर भगवान गणेश के किसी स्वरूप के बजाय उनके भक्त बल्लाल के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि बल्लाल नाम का एक बालक श्रीगणेश के परम भक्त था। उसने इस स्थान पर गणेशजी की आराधना की थी, जिससे प्रसन्न होकर गणपति ने उसे यहीं दर्शन दिए थे।

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वरदविनायक गणेश
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वरदविनायक गणेश

अष्टविनायक यात्रा का चौथा मंदिर महड का वरदविनायक है। यह रायगढ़ जिले में स्थित है। मान्यता है कि यहाँ स्थापित गणेश प्रतिमा स्वंयभू है जो सन 1690 ईस्वी में पास की एक झील से प्राप्त हुई थी। प्राचीन समय में ऋषि गृत्समद ने यहां घोर तपस्या कर श्रीगणेश को प्रसन्न किया था और उनसे इसी स्थान पर सदा के लिए स्थापित होने की प्रार्थना की थी। तभी से श्रीगणेश यहां वरदविनायक के रूप में स्थित हैं।

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चिंतामणि गणपति
Image Credit : Social Media

चिंतामणि गणपति

अष्ट विनायक में पांचवें स्थान पर है थेऊर का चिंतामणि गणपति मंदिर। यह पुणे के पास स्थित है। कथा के अनुसार कपिल मुनि के पास चिंतामणि नाम की दिव्य मणि थी जिसे एक असुर ने उसे चुरा लिया था। तब भगवान गणेश ने उस असुर को परास्त कर यह मणि उन्हें वापस दिलाई। कपिल मुनि ने वह मणि गणेशजी के गले में पहना दी। इसके पाद गणपति यहां चिंतामणि विनायक के रूप में विराजमान हो गये।

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गिरिजात्मज गणपति
Image Credit : Social Media

गिरिजात्मज गणपति

अष्टविनायक यात्रा का छठा मंदिर लेण्याद्री में है जो पुणे नासिक राजमार्ग पर स्थित है। गिरजात्मज विनायक का अर्थ है गिरिजा यानी माता पार्वती के पुत्र गणेश। यहाँ भगवान गणेश बाल रूप में विराजमान हैं। इन्हीं के नाम पर इन गुफाओं को गणेश गुफा भी कहा जाता है। मान्यता है कि देवी पार्वती ने यहीं तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप उन्हें गणेश संतान रूप में प्राप्त हुए।

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विघ्नेश्वर गणपति
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विघ्नेश्वर गणपति

अष्ट विनायक में सातवां है ओझर का विघ्नेश्वर गणपति। कथा के अनुसार भगवान गणेश ने इसी स्थान पर विघ्नासुर नामक असुर को पराजित किया था। तभी से वे विघ्नेश्वर नाम से यहां स्थापित हो गए। वर्तमान मंदिर का निर्माण बाजीराव पेशवा के भाई चिमाजी आपा ने करवाया था। मंदिर का मुख्य आकर्षण में सोने से मढ़ा हुआ शिखर है।

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महागणपति
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महागणपति

अष्टविनायक यात्रा का आठवां और अंतिम मंदिर रांजणगांव का महागणपति मंदिर है। यह पुणे से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मान्यता है कि त्रिपुरासुर से युद्ध से पहले भगवान शिव ने गणपति की यहां आराधना की थी। इसी वजह से यहां गणेश पूजा को किसी बड़े काम की शुरुआत से पहले विशेष महत्व देने की परंपरा बताई जाती है।

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

About the Author

MM
Manish Meharele
मनीष मेहरेले। मीडिया में 19 साल का अनुभव, अभी एशियानेट न्यूज हिंदी के डिजिटल में काम कर रहे हैं। महाभारत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। ज्योतिष-हस्तरेखा, उपाय, वास्तु, कुंडली जैसे टॉपिक पर पकड़ है। यह जीव विज्ञान में बीएससी स्नातक हैं । करियर की शुरुआत स्थानीय अखबार दैनिक अवंतिका से की। 2010 से 2019 तक दैनिक भास्कर डॉट कॉम में धर्म डेस्क पर काम किया है।
गणेश चतुर्थी
 

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