Sawan Pradosh Vrat 2026: कब है सावन का दूसरा प्रदोष व्रत, 25 या 26 अगस्त? जानें मुहूर्त-मंत्र और पूजा विधि

Published : Aug 20, 2026, 10:39 AM IST
Sawan Pradosh Vrat 2026 Date

सार

Sawan Mai Pradosh Vrat Kab Hai: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हर महीने की त्रयोदशी तिथि को व्रत किया जाता है। इसे प्रदोष व्रत कहते हैं। इस व्रत का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है।

Sawan Pradosh Vrat 2026 Date: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस महीने में शिव पूजन के लिए कईं विशेष अवसर आते हैं, प्रदोष व्रत भी इनमें से एक है। ये व्रत दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है। सावन का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त को हो चुका है। अब दूसरा प्रदोष व्रत कब है? इसे लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बन रही है। आगे जानिए सावन का दूसरा प्रदोष व्रत कब किया जाएगा, साथ ही पूजा का शुभ समय क्या रहेगा और पूजा विधि के बारे में…

ये भी पढ़ें-
Chandra Grahan 2026: अगस्त में होगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं? जानें डेट और टाइम

कब है सावन 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत?

पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त, मंगलवार की सुबह 06 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी जो 26 अगस्त, बुधवार की सुबह 07 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। प्रदोष व्रत में शिवजी की पूजा शाम को की जाती है और ये स्थिति 25 अगस्त को बन रही है। इसलिए इसी दिन सावन का दूसरा प्रदोष व्रत किया जाएगा।

ये भी पढ़ें-
Kajari Teej 2026: कब है कजरी तीज, 30 या 31 अगस्त, कब करें रतजगा? यहां जानें पूरी डिटेल

25 अगस्त 2026 प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त

सावन के दूसरे प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 24 मिनिट से रात 08 बजकर 39 मिनिट तक रहेगा। इस दौरान आप विधि-विधान से शिवजी की पूजा कर सकते हैं।

प्रदोष व्रत में कैसे करें पूजा, कौन-सा मंत्र बोलें?

- प्रदोष व्रत की सुबह यानी 25 अगस्त को स्नान करके साफ कपड़े पहनें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। पूरे दिन उपवास रखें। ऐसा संभव हो तो एक समय फलाहार कर सकते हैं।
- शुभ मुहूर्त शुरू होने पर शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल, फूल, सफेद वस्त्र, भांग, शहद भगवान शिव को अर्पित करें।
- गाय के घी का दीपक जलाएं। पूजा करते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। इस तरह पूजा करने के बाद महादेव की विधि-विधान से आरती करें और प्रसाद बांटें।
- संभव हो तो पूजा स्थान पर ही बैठकर शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इस तरह प्रदोष व्रत पर शिवजी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

PREV

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

Read more Articles on

Recommended Stories

Chandra Grahan 2026: अगस्त में होगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं? जानें डेट और टाइम
Kajari Teej 2026: कब है कजरी तीज, 30 या 31 अगस्त, कब करें रतजगा? यहां जानें पूरी डिटेल