Sawan Somwar Vrat Katha: शिवभक्ति से बदली किस्मत, मृत पुत्र भी हो गया जीवित, पढ़ें सावन सोमवार की ये कथा

Published : Aug 03, 2026, 06:00 AM IST
Sawan Somwar Vrat Katha

सार

Sawan Somwar Katha: इस बार सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को है। इस दिन व्रत का विशेष महत्व है। जो भी व्यक्ति इस दिन व्रत करता है उसे इसकी कथा जरूर सुननी चाहिए।

Sawan Somwar Vrat Katha In Hindi: हिंदू पंचांग का पांचवां महीना है श्रावण, जिसे सावन भी कहते हैं। इस महीने में शिव पूजा का विशेष महत्व है। इस बार सावन मास 30 जुलाई से शुरू हो चुका है जो 28 अगस्त तक रहेगा। सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को है। इस दिन बहुत सारे लोग व्रत करते हैं। जो लोग सावन सोमवार का व्रत करते हैं, उनके लिए सावन सोमवार व्रत की कथा सुनना भी जरूरी है। तभी व्रत का पूरा फल मिलता है, ऐसी मान्यता है। आगे जानिए सावन सोमवार की कथा…

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ये है सावन सोमवार की कथा (Sawan Somwar Vrat Katha)

- प्राचीन समय में एक नगर में धनवान साहूकार रहता था। वह भगवान शिव का परम भक्त था और प्रत्येक सोमवार शिव-पार्वती की पूजा करता था। संतान न होने के कारण वह हमेशा दुखी रहता था। उसकी भक्ति देख भगवान शिव एक दिन प्रकट हुए और उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। साथ ही ये भी कहा कि उसके पुत्र की आयु केवल 16 वर्ष होगी।

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कुछ समय बाद साहूकार के घर सुंदर पुत्र का जन्म हुआ। जब वह बालक 11 वर्ष का हुआ, तब उसे शिवजी का वरदान और भविष्यवाणी याद आई। तब साहूकार ने अपने पुत्र को उसके मामा के साथ शिक्षा प्राप्त करने के लिए काशी भेज दिया और जाते समय कहा कि रास्ते में जहां भी संभव हो, ब्राह्मणों को भोजन अवश्य कराना।
यात्रा के दौरान एक नगर में राजा की पुत्री का विवाह हो रहा था। जिस राजकुमार से राजकुमारी का विवाह होना था, उसकी एक आंख नहीं थी। इस बात को छिपाने के लिए राजकुमार के पिता ने साहूकार के सुंदर पुत्र को बहला-फुसलाकर दूल्हे के रूप में विवाह मंडप में बैठा दिया।
विवाह होने के बाद साहूकार का पुत्र काशी जाने लगा। जाने से पहले उसने राजकुमारी के दुपट्टे पर लिख दिया ‘जिसके साथ तुम्हें विदा किया जाएगा, वह मैं नहीं, बल्कि काना राजकुमार है।’ जब राजकुमारी ने यह पढ़ा तो उसने काने राजकुमार के साथ जाने से इंकार कर दिया।
उधर साहूकार का पुत्र अपने मामा के साथ काशी पहुंचकर शिक्षा ग्रहण करने लगा। जिस दिन वह 16 वर्ष का हुआ उसी दिन उसकी मृत्यु हो गई। उस समय भगवान शिव और माता पार्वती काशी में ही थे। 16 वर्षीय सुंदर युवक को मृत देखकर माता पार्वती अत्यंत दुखी हुईं।
देवी पार्वती ने भगवान शिव से उस युवक को जीवनदान देने की प्रार्थना की। भगवान शिव ने अपनी कृपा से साहूकार का पुत्र पुनः जीवित हो गया। शिक्षा पूरी होने पर जब वह अपने मामा के साथ घर लौटने लगा। रास्ते में वही नगर आया, जहां उसका विवाह हुआ था।
राजकुमारी ने युवक को देखते ही पहचान लिया और राजा को सारी बात बताई। राजा ने उसे अपना वास्तविक दामाद स्वीकार किया और सम्मानपूर्वक अपनी पुत्री तथा भरपूर धन-संपत्ति के साथ विदा किया। जब साहूकार ने अपने पुत्र को जीवित और सकुशल देखा तो वह बहुत खुश हुआ।
उसी रात भगवान शिव ने उसे सपने में दर्शन देकर कहा कि यह सब सावन सोमवार व्रत, शिवभक्ति और सच्ची श्रद्धा का ही फल है। तभी से सावन सोमवार व्रत का महत्व और भी अधिक माना जाने लगा। इस कथा को सुने बिना सावन सोमवार व्रत का पूरा फल नहीं मिलता।

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