
Shami Puja on Dussehra 2026: दशहरा यानी विजयादशमी से अनेक परंपराएं और मान्यताएं जुड़ी हैं। ऐसी ही एक परंपरा है शमी पूजन की। मान्यता है कि दशहरे पर शमी के पेड़ की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और काम में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। इस पेड़ को शनि देव से भी जोड़कर देखा जाता है। कई जगहों पर दशहरे के दिन शमी के पत्ते बांटने की परंपरा है, जिन्हें सोने के प्रतीक के रूप में दिया जाता है। जानिए दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है, इसकी विधि, मंत्र और खास उपाय…
मान्यताओं के अनुसार, शमी वृक्ष को शुभता, विजय और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। महाभारत के समय पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने शस्त्र शमी के पेड़ पर छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने के बाद उन्होंने इसी पेड़ से अपने शस्त्र वापस लिए थे। इसलिए शमी वृक्ष को विजय और शक्ति से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, भगवान श्रीराम से जुड़ी मान्यताओं में भी शमी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
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- सुबह 10:46 से दोपहर 12:11 तक
- दोपहर 11:48 से 12:34 तक
- दोपहर 01:59 से 02:45 मिनिट तक (विजय मुहूर्त)
- दोपहर 03:02 से शाम 04:28 तक
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- सुबह 10:46 से दोपहर 12:11 तक
- दोपहर 01:14 से 03:30 तक (विजय मुहूर्त)
- दोपहर 03:02 से शाम 04:27 तक
- शाम 04:27 से 05:52 तक
- सबसे पहले शमी वृक्ष के पास की जगह साफ करें। पेड़ के पास दीपक जलाएं और जल अर्पित करें। शमी वृक्ष पर कुमकुम और चावल चढ़ाएं।
- फूल अर्पित करके श्रद्धा के साथ प्रणाम करें। भगवान श्रीराम और शनि देव का ध्यान करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
- पूजा के बाद शमी वृक्ष की परिक्रमा करें। दीपक से आरती भी करें। इस तरह शमी वृक्ष की पूजा से आपके परेशानियां दूर हो सकती हैं।
शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी।
अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥
इस मंत्र के जरिए शमी वृक्ष से पापों के शमन, शत्रुओं से रक्षा और जीवन में विजय की कामना की जाती है।
1. दशहरे पर शमी वृक्ष के पास दीपक जलाने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
2. शमी की पूजा करने से शनि से संबंधित दोष दूर होते हैं।
3. घर के बाहर शमी का पौधा लगाने से किस तरह की निगेटिव एनर्जी घर में प्रवेश नहीं करती।
4. प्रतिदिन शमी वृक्ष पर जल चढ़ाने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
5. शिवजी को शमी के पत्ते चढ़ाने से उनकी कृपा हम पर हमेशा बनी रहती है।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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