Shastra Puja Mantra: दशहरा हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन शस्त्र पूजन की भी परंपरा है। ये परंपरा हमें शस्त्रों का महत्व बताती है कि अधर्म से युद्ध करने के लिए शस्त्र उठाने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए।

Shastra Puja 2026 Kab Kare: हर साल विजयादशमी पर लोग शस्त्र पूजा भी करते हैं। ये प्राचीन परंपरा है जो हजारों सालों से निभाई जा रही है। सेना और पुलिस से जुड़े कई संस्थानों में भी इस दिन शस्त्र पूजन की परंपरा निभाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि शस्त्रों की पूजा हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने और धर्म की रक्षा करने का संदेश देती है। आगे जानिए साल 2026 में शस्त्र पूजा कब होगी, इसका शुभ मुहूर्त क्या है और पूजा की विधि व मंत्र कौन-से हैं…

शस्त्र पूजा 2026 कब करें?

पंचांग के अनुसार, इस साल दशहरा यानी विजयादशमी उत्सव 20 अक्टूबर, मंगलवार और 21 अक्टूबर, बुधवार 2 दिन मनाया जाएगा। इसलिए दोनों ही दिन शस्त्र पूजा की जाती है। इसके लिए आप स्थानीय विद्वानों से चर्चा कर सकते हैं।

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शस्त्र पूजा मुहूर्त 20 अक्टूबर 2026

20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 59 मिनिट से शुरू होगा जो 02 बजकर 45 मिनिट तक रहेगा। ये समय शस्त्र पूजा के लिए श्रेष्ठ है। इसके अलावा चौघड़िया के हिसाब से अन्य मुहूर्त इस प्रकार हैं-
- सुबह 09:20 से 10:46 तक
- सुबह 10:46 से दोपहर 12:11 तक
- दोपहर 11:48 से 12:34 तक
- दोपहर 12:11 से 01:37 तक
- दोपहर 03:02 से शाम 04:28 तक

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शस्त्र पूजा मुहूर्त 21 अक्टूबर 2026

21 अक्टूबर, बुधवार को शस्त्र पूजा के लिए विजय मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 14 मिनिट से 03 बजकर 30 मिनिट तक रहेगा। इस दिन के अन्य मुहूर्त इस प्रकार हैं-
सुबह 10:46 से दोपहर 12:11 तक
दोपहर 03:02 से शाम 04:27 तक
शाम 04:27 से 05:52 तक

कैसे करें शस्त्र पूजा, कौन-सा मंत्र बोलें?

- सबसे पहले पूजा की जगह को साफ करें और शस्त्रों या औजारों को व्यवस्थित तरीके से रखें।
- पूजा के लिए फूल, कुमकुम, अक्षत यानी चावल, जल, मौली, दीपक और मिठाई तैयार रखें।
- शुभ मुहूर्त में शस्त्रों पर साफ जल छिड़कें। इसके बाद कुमकुम से तिलक लगाएं और फूल व अक्षत अर्पित करें।
- शस्त्रों पर मौली बांधें और दीपक जलाकर पूजा करें। इस दौरान भगवान श्रीराम और मां दुर्गा का ध्यान करें।
- पूजा करते समय नीचे दिया गया मंत्र बोलें और अपने काम में सफलता व सुरक्षा की प्रार्थना करें।
- अंत में मिठाई या फल का भोग लगाएं और आरती करें। इस तरह शस्त्र पूजा करने से मन में आत्मविश्वास बना रहता है।

शस्त्र पूजा का मंत्र
आश्विनस्य सिते पक्षे दशम्यां तारकोदये।
स कालो विजयो ज्ञेयः सर्वकार्यार्थसिद्धये॥

इस मंत्र के माध्यम से विजयादशमी के शुभ समय और कार्यों में सफलता की कामना की जाती है।

दशहरे पर शस्त्र पूजा क्यों की जाती है?

धार्मिक कथाओं के अनुसार, जब महिषासुर नाम के दैत्य ने देवताओं को परेशान किया, तब देवी दुर्गा ने उसका वध करने के लिए युद्ध किया। मान्यता है कि देवताओं ने देवी को अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र दिए थे। मां दुर्गा ने इन्हीं शस्त्रों की सहायता से महिषासुर का अंत किया। इसी तरह विजयादशमी को भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से भी जोड़ा जाता है। इन्हीं मान्यताओं के चलते दशहरे पर शस्त्रों की पूजा की जाती है। यह परंपरा शक्ति, साहस और धर्म की रक्षा के महत्व को याद दिलाती है। आज के समय में लोग अपने औजारों, मशीनों, वाहनों और कामकाज से जुड़े उपकरणों का पूजन भी इसी भावना से करते हैं।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।