Sharad Purnima Vrat Katha: व्रत के असर से मृत बच्चा हो गया जीवित! पढ़ें शरद पूर्णिमा की ये रोचक कथा

Published : Oct 25, 2026, 06:30 AM IST
Sharad Purnima Vrat Katha

सार

Sharad Purnima Ki Katha: इस बार शरद पूर्णिमा का व्रत 25 अक्टूबर, रविवार को किया जाएगा। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी धरती पर आती हैं। इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा भी है जिसे सुने बिना इस व्रत का पूरा फल नहीं मिलता।

Sharad Purnima Katha In Hindi: आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात देवी लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर कृपा करती हैं। शरद पूर्णिमा पर व्रत और पूजा करने के साथ कथा सुनने का भी खास महत्व है। आइए जानते हैं दो बहनों से जुड़ी शरद पूर्णिमा की रोचक कथा।

शरद पूर्णिमा की कथा

प्राचीन समय में एक गांव में दो बहनें रहती थीं। दोनों हर पूर्णिमा पर व्रत रखती थीं, लेकिन उनके व्रत करने के तरीके में अंतर था। बड़ी बहन पूरी श्रद्धा से व्रत करती थीं और सभी नियमों का पालन करती थी। वहीं, छोटी बहन व्रत तो रखती थी, लेकिन न तो नियमों का ठीक से ध्यान देती थी और न ही पूरी श्रद्धा से पूजा करती थी।

ये भी पढ़ें-
Sharad Purnima 2026: कैसे बर्तन में बनाएं शरद पूर्णिमा पर खीर, कितनी देर रखें चांद की रोशनी में, कब खाएं?

समय बीतने के साथ दोनों बहनों का विवाह हो गया। कुछ समय बाद बड़ी बहन ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया, जबकि छोटी बहन को संतान प्राप्ति में काफी परेशानी हुई। जब उसके घर संतान हुई भी, तो वह जीवित नहीं रह सकी। इस घटना से छोटी बहन बहुत दुखी रहने लगी।

ये भी पढ़ें-
Sharad Purnima 2026: सिर्फ 51 मिनट के शुभ मुहूर्त में कैसे करें लक्ष्मी पूजा? यहां जानें विधि, मंत्र और आरती

एक दिन उसने एक संत से अपनी परेशानी का कारण पूछा। संत ने उसे बताया कि वह पूर्णिमा का व्रत बिना श्रद्धा और नियमों के करती थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत का महत्व तभी है, जब उसे सच्चे मन और पूरी आस्था के साथ किया जाए। संत की बात सुनकर छोटी बहन को अपनी गलती का एहसास हुआ।
इसके बाद उसने शरद पूर्णिमा का व्रत पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से किया। मान्यता के अनुसार, कुछ समय बाद उसे एक स्वस्थ पुत्र की प्राप्ति हुई। लेकिन दुर्भाग्य से जन्म के बाद उस बच्चे की भी मृत्यु हो गई। छोटी बहन को विश्वास था कि उसकी बड़ी बहन के स्पर्श से बच्चा फिर से जीवित हो सकता है।
उसने बच्चे को कपड़े से ढककर बिस्तर पर लिटा दिया और बड़ी बहन को अपने घर बुलाया। जब बड़ी बहन वहां आई और बिस्तर पर बैठी, तो उसका हाथ बच्चे को छू गया। उसके स्पर्श से बच्चा दोबारा जीवित हो उठा। यह देखकर छोटी बहन हैरान रह गई और उसने बड़ी बहन को पूरी बात बता दी।
छोटी बहन ने कहा कि बड़ी बहन के पूर्णिमा व्रत और चंद्रदेव की कृपा के कारण ही उसके बच्चे को नया जीवन मिला है। इसके बाद दोनों बहनों ने व्रत की महिमा को स्वीकार किया। मान्यता है कि तभी से शरद पूर्णिमा के व्रत और कथा सुनने की परंपरा प्रचलित हुई।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

PREV

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

Read more Articles on

Recommended Stories

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा की रात करें देवी लक्ष्मी के 108 नामों का जाप, दूर होगी पैसों की तंगी!
Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर कितनी देर रहेगी भद्रा, पूजा कर पाएंगे या नहीं? दूर करें कन्फ्यूजन