Sharad Purnima Kheer Significance: आश्विन मास की पूर्णिमा पर हर साल शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। इस पर्व से अनेक मान्यताएं जुड़ी हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं। कहते हैं कि द्वापर युग में इसी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने महारास किया था।

Sharad Purnima 2026 Date: शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने और उसे चांद की रोशनी में कुछ देर रखकर खाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। इसलिए इस खीर में विशेष औषधीय गुण आ जाते हैं जिसे खाने से कईं तरह की रोग अपने आप ही दूर हो जाते हैं। इस बार शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर, रविवार को मनाया जाएगा। जानें इस दिन खीर किस बर्तन में बनाएं, इसे कितनी देर चांद की रोशनी में रखें और इसे खाने का सही समय क्या है…

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शरद पूर्णिमा पर कैसे बनाएं खीर?

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए तभी इसके औषधीय गुण बने रहते हैं, जैसे इसे बनाने के लिए गाय के दूध का उपयोग करें। खीर बनाते समय बर्तन का चयन भी ठीक होना चाहिए। वैसे तो चंद्रमा की धातु चांदी है लेकिन सभी के घरों में चांदी के बर्तन नहीं होते इसलिए मिट्टी के बर्तन का उपयोग करना चाहिए। मिट्टी के बर्तन में बनी खीर औषधीय गुणों वाली मानी गई है।

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कितनी देर चांद की रोशनी में रखें खीर?

परंपरा के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे ही खीर बनानी चाहिए और भगवान को भोग लगाने के बाद इसे रात भर चंद्रमा की रोशनी में रखनी चाहिए। लेकिन आज के समय में ऐसा करना सभी के लिए संभव नही है इसलिए खीर बनाकर कुछ घंटों के लिए चांद की रोशनी में रख सकते हैं।

शरद पूर्णिमा पर खीर कब खाएं?

वैसे तो शरद पूर्णिमा की पूरी रात खीर को चांद की रोशनी में रखने के बाद सुबह इसे खाना चाहिए लेकिन ऐसा न कर पाएं तो रात में देवी लक्ष्मी की पूजा के बाद इसे खा सकते हैं। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी धरती पर आती हैं इसलिए निशिथ काल में इनकी पूजा की परंपरा है। इस बार निशिथ काल पूजा मुहूर्त रात 11:40 बजे से 12:31 बजे तक है। इसके बाद खीर को प्रसाद रूप में खाएं।


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