Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी व्रत कब? जानें पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त

Published : Jan 13, 2026, 10:07 AM IST

Shattila Ekadashi 2026: माघ मास के कृष्ण पक्ष एकादशी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथो में बताया गया है। इसे षटतिला एकदाशी कहते हैं। इस दिन तिल का उपयोग 6 कामों में किया जाता है, इसलिए इसे षटतिला कहते हैं।

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जानें षटतिला एकादशी का महत्व

Kab Hai Shattila Ekadashi 2026: धर्म ग्रंथों में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। साल में कुल 24 एकादशी तिथि होती है। इन सभी का नाम और महत्व अलग-अलग है। इनमें से माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी कहते हैं। इस व्रत में तिल का उपयोग 6 अलग-अलग कामों करने का विधान है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। आगे जानिए कब है षटतिला एकादशी, पूजा विधि, मंत्र, शुभ मुहूर्त सहित पूरी डिटेल…


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कब है षटतिला एकादशी 2026?

पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 13 जनवरी, मंगलवार की दोपहर 03 बजकर 18 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 14 जनवरी, बुधवार की शआम 05 बजकर 53 मिनिट तक रहेगी। चूंकि एकादशी तिथि का सूर्योदय 14 जनवरी को होगा, इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा। इस दिन अमृतसिद्धि और सर्वार्थसिद्धि नाम के 2 शुभ योग भी बनेंगे जिससे इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाएगा।


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षटतिला एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

सुबह 07:14 से 08:34 तक
सुबह 08:34 से 09:55 तक
सुबह 11:15 से दोपहर 12:35 तक
दोपहर 03:16 से शाम 04:36 तक
दोपहर 04:36 से 05:57 तक

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इस विधि से करें षट्तिला एकादशी का व्रत

- 14 जनवरी, बुधवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। व्रत के नियमों का पालन करते हुए दिन बिताएं।
- ऊपर बताए गए किसी भी शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें। पूजा का पूरा सामान एक स्थान पर एकत्रित कर लें।
- मुहूर्त शुरू होने पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र एक बाजोट यानी पटिए पर घर में किसी साफ स्थान पर स्थापित करें।
- भगवान की प्रतिमा पर तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं। दीपक लगाएं। अबीर, रोली, कुमकुम आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाएं।
- इस व्रत में भगवान विष्णु को उड़द-तिल से बनी खिचड़ी का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है। इसमें तुलसी के पत्ते जरूर डालें।
- इस तरह भगवान की पूजा करने के बाद इस मंत्र से अर्घ्य दें-
सुब्रह्मण्य नमस्तेस्तु महापुरुषपूर्वज।
गृहाणाध्र्यं मया दत्तं लक्ष्म्या सह जगत्पते।।
- पूजा के बाद विधि-विधान से आरती करें। इस व्रत संकल्प के अनुसार एक समय फलाहार या दूध ले सकते हैं।
- रात को सोए नहीं, भजन करते हुए जागरण करें। अगले दिन यानी 15 जनवरी को ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद स्वंय भोजन करें।

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भगवान विष्णु की आरती लिरिक्स हिंदी में

ऊं जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥
॥ ऊं जय जगदीश हरे..॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का ।
सुख सम्पति घर आवे, सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥
॥ ऊं जय जगदीश हरे..॥
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी, स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।
तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी ॥
॥ ऊं जय जगदीश हरे..॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी ॥
॥ ऊं जय जगदीश हरे..॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता ।
मैं मूरख खलगामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥
॥ ऊं जय जगदीश हरे..॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूं दयामय, किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति ॥
॥ ऊं जय जगदीश हरे..॥
दीन-बन्धु दुःख-हर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे ।
अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे ॥
॥ ऊं जय जगदीश हरे..॥
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा ।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा ॥
ऊं जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥
ऊं जय जगदीश हरे


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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