Shivratri September 2026: कब है मासिक शिवरात्रि? जानें मंत्र, मुहूर्त सहित पूजा विधि और महत्व

Published : Sep 08, 2026, 11:02 AM IST
September Shivratri 2026 Details

सार

Shivratri 2026 Date: हर महीने में एक बार शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इसे मासिक शिवरात्रि कहते हैं। इस व्रत में भी रात भर महादेव की पूजा करने का विशेष महत्व है।

September Shivratri 2026 Details: धर्म ग्रंथों के अनुसार हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इस व्रत का महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है। मान्यता है कि शिवरात्रि पर की गई पूजा, उपाय, मंत्र जाप आदि बहुत ही जल्दी शुभ फल देते हैं। इस बार सावन शिवरात्रि का पर्व 9 सितंबर, बुधवार को किया जाएगा। आगे जानिए शिवरात्रि व्रत की पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त की डिटेल…

सितंबर 2026 शिवरात्रि पूजा मुहूर्त

विद्वानों के अनुसार मासिक शिवरात्रि में रात के चारों पहर में शिवजी की पूजा का विधान है। लेकिन यदि ऐसा न हो पाएं तो रात्रि में एक बार निशिथ काल में पूजा करके भी इस व्रत का पूरा फल प्राप्त किया जा सकता है। 9 सितंबर को निशिथ काल पूजा मुहूर्त रात 11 बजकर 55 मिनिट से 12 बजकर 41 मिनिट तक रहेगा।

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मासिक शिवरात्रि व्रत-पूजा विधि

- 9 सितंबर, बुधवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव की पूजा करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूरे दिन व्रत के नियमों का पालन करें।
- पूजा के शुभ मुहूर्त से पहले सभी जरूरी पूजन सामग्री एक जगह तैयार रख लें। स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें और पूजा की तैयारी पूरी करें।
- शुभ मुहूर्त शुरू होने पर सबसे पहले शिवलिंग का जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही और शहद से अभिषेक करें। अंत में एक बार फिर शुद्ध जल शिवलिंग पर चढ़ाएं।

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- अब शिवलिंग के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद बेलपत्र, भांग, आंकड़े के फूल, धतूरा, चावल, वस्त्र, जनेऊ, कलावा और शमी के पत्ते सहित अन्य पूजन सामग्री भगवान शिव को अर्पित करें।
- पूजा के दौरान लगातार ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। इसके अलावा इस मंत्र का भी जाप कर सकते हैं-
ऊं तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
- पूजा पूरी होने के बाद भगवान शिव को नारियल, मिठाई और फलों का भोग लगाएं। इसके बाद परिवार के साथ कपूर से भगवान शिव की आरती करें।
- अगले दिन यानी 10 सितंबर की सुबह व्रत का पारण करें। इसके बाद ब्राह्मणों को घर बुलाकर भोजन कराएं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा दें।
- ब्राह्मणों को विदा करने के बाद स्वयं भोजन ग्रहण करें। विधि-विधान से मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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