Kushgrahani Amavasya 2026 Date: इस बार भाद्रपद मास की अमावस्या 2 दिन रहेगी, जिसके चलते असमंजस की स्थिति बन गई है कि श्राद्ध कब करें और स्नान-दान कब?

Kushgrahani Amavasya Kab Hai: ज्योतिष शास्त्र में कुल 16 तिथियां बताई गई हैं। इनमें से अमावस्या तिथि भी एक है। इस तिथि का महत्व काफी अधिक माना गया है। हर महीने के मध्य में ये तिथि आती है। इस तरह एक साल में कुल 12 बार अमावस्या तिथि का संयोग बनता है। इनमें से भाद्रपद मास की अमावस्या को कुशग्रहणी के नाम से जाना जाता है। इस बार भाद्रपद मास की अमावस्या का संयोग 2 दिन बन रहा है, जिसके चलते ये कन्फ्यूजन हो रहा है कि किस दिन श्राद्ध करें और कब स्नान-दान? उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से जानिए कुशग्रहणी अमावस्या की सही डेट…

कब से कब तक रहेगी कुशग्रहणी अमावस्या?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास की अमावस्या 10 सितंबर, गुरुवार की सुबह 10 बजकर 33 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 11 सितंबर, शुक्रवार की सुबह 08 बजकर 56 मिनिट तक रहेगी। इस तरह अमावस्या तिथि का संयोग 10 और 11 सितंबर दो दिन बन रहा है। इस तिथि के स्वामी पितृ हैं, इसलिए इस दिन पितरों की शांति के लिए श्राद्ध आदि करने की परंपरा है।

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सितंबर 2026 में श्राद्ध की अमावस्या कब है?

विद्वानों के अनुसार पितरों का श्राद्ध दोपहर 12 बजे से पहले कुतप काल में करना चाहिए। चूंकि भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि का संयोग 10 सितंबर, गुरुवार को दोपहर में बन रहा है, इसलिए इसी दिन पितरों की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण आदि करना श्रेष्ठ रहेगा। इस दिन श्राद्ध आदि करने से ये श्राद्ध अमावस्या कहलाएगी।

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सितंबर 2026 में स्नान-दान अमावस्या कब है?

विद्वानों के अनुसार, स्नान-दान सूर्योदय तिथि देखते हुए करना चाहिए। चूंकि भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि का सूर्योदय 11 सितंबर, शुक्रवार को होगा, इसलिए इसी दिन स्नान-दान का महत्व माना जाएगा। इस दिन सुबह पवित्र नदी में स्नान करके जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है।

भाद्रपद मास की अमावस्या को कुशग्रहणी क्यों कहते हैं?

धर्म ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद अमावस्या तिथि पर कुशा (एक प्रकार की विशेष घास) विधि पूर्वक तोड़कर इकट्ठी की जाती है। इसका उपयोग साल भर की जाने वाली पूज आदि में किया जाता है। कुशा घास को तोड़ने की तिथि होने से ही इसे कुशग्रहणी अमावस्या नाम दिया गया है।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।