Janaki Jayanti 2026: 9 या 10 फरवरी, कब है सीता अष्टमी? जानें डेट, पूजा विधि, मंत्र-मुहूर्त

Published : Feb 07, 2026, 02:31 PM ISTUpdated : Feb 09, 2026, 09:27 AM IST

Sita Ashtami 2026 Kab Hai: धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीराम की पत्नी देवी सीता का जन्म फाल्गुन मास में हुआ था। इसलिए हर साल इस महीने में सीता अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। जानें साल 2026 में कब है सीता अष्टमी, पूजा विधि और मुहूर्त की डिटेल।

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क्यों मनाते हैं सीता अष्टमी?

Janaki Jayanti 2026 Date: इस बार जानकी जयंती का पर्व 9 फरवरी, सोमवार को मनाया जाएगा। इसे सीता अष्टमी भी कहते हैं। मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में इसी तिथि पर देवी सीता का जन्म हुआ था। भगवान श्रीराम की पत्नी सीता स्वयं देवी लक्ष्मी का अवतार थी जो धरती से प्रकट हुई थीं। हर साल फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर सीता अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इसे जानकी जयंती भी कहते हैं। आगे जानिए सीता अष्टमी पर कैसे करें पूजा, शुभ मुहूर्त आदि की डिटेल…

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कब है सीता अष्टमी 2026?

पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 09 फरवरी, सोमवार की सुबह 05 बजकर 01 मिनिट से शुरू होगी, जो 10 फरवरी, मंगलवार की सुबह 07 बजकर 27 मिनिट तक रहेगी। 9 फरवरी को अष्टमी तिथि पूरे दिन रहेगी, इसलिए इसी दिन सीता अष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन वृद्धि, ध्रुव व मित्र नाम के 3 शुभ योग भी रहेंगे, जिससे इस पर्व का महत्व और भी अधिक हो गया है।

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9 फरवरी 2026 के शुभ मुहूर्त

सुबह 07:06 से 08:30 तक
सुबह 09:53 से 11:17 तक
दोपहर 12:18 से 01:03 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 02:04 से 03:28 तक
शाम 04:51 से 06:15 तक

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सीता अष्टमी पर कैसे करें व्रत-पूजा? जानें विधि

- 9 फरवरी, सोमवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद सीता अष्टमी व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें।
- ऊपर बताए किसी भी शुभ मुहूर्त में घर में किसी साफ स्थान पर लकड़ी के बाजोट पर श्रीराम और देवी सीता का चित्र स्थापित करें पूजा शुरू करें।
- भगवान को फूलों की माला पहनाएं, कुमकुम से तिलक करें और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। अबीर, गुलाल आदि चीजें भी एक-एक करके चढ़ाएं।
- भगवान श्रीराम को पीले वस्त्र अर्पित करें और माता सीता को सोलह श्रृंगार का सामान जैसे चुनरी, चूड़ी, मेहंदी, हल्दी आदि चीजें चढ़ाएं।
- इसके बाद अपनी इच्छा अनुसार मिठाई व फल आदि का भोग लगाएं। विधिपूर्वक आरती करें। अगर मन में कोई इच्छा है तो वह बोल सकते हैं।
- इस तरह पूजा करने के बाद संकल्प ले अनुसार एक समय फलाहार कर सकते हैं। रात्रि में जाकर भजन-कीर्तन करें या मंत्र जाप भी कर सकते हैं।
- अगले दिन यानी 10 फरवरी, मंगलवार को अपनी इच्छा अनुसार दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारणा करें। इससे आपको सुख-समृद्धि मिलेगी।

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कैसे हुआ था देवी सीता का जन्म?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, एक बार जब राजा जनक किसी विशेष कार्य की सिद्धि के लिए हल से धरती जोत रहे थे। तभी उनका हल किसी कठोर चीज से टकराया। उस स्थान पर एक कलश था। कलश में एक सुंदर कन्या थी। राजा जनक ने उस कन्या को अपनी पुत्री मानकर पनी संतान की तरह उसका पालन-पोषण किया। हल की नोक को सीता कहते हैं, इसलिए राजा जनक ने उस कन्या का नाम सीता रखा।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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