Som Pradosh Vrat Katha: महादेव कैसे बदलते हैं भक्तों की किस्मत? पढ़ें सोम प्रदोष की रोचक कथा

Published : Aug 10, 2026, 06:00 AM IST
Som Pradosh Vrat Katha

सार

Sawan Som Pradosh 2026: 10 अगस्त 2026 का सावन का दूसरा सोमवार है। इस दिन प्रदोष व्रत भी किया जाएगा। सावन में प्रदोष व्रत का महत्व और भी अधिक हो जाता है।

Som Pradosh Vrat Katha In Hindi: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए अनेक व्रत किए जाते हैं, प्रदोष व्रत भी इनमें से एक है। ये व्रत हर महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है। इस बार 10 अगस्त 2026 में बहुत ही शुभ संयोग बन रहा है क्योंकि इस दिन सावन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। सोमवार को त्रयोदशी तिथि होने से इस दिन सोम प्रदोष का व्रत किया जाएगा। इस व्रत की एक रोचक कथा भी है जिसे सुनकर ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है।

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सोम प्रदोष व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है। किसी नगर में एक गरीब ब्राह्मणी रहती थी। उसके पति का देहांत हो चुका था। उसके साथ उसका एक छोटा बेटा रहता था। घर चलाने के लिए वह रोज सुबह अपने बेटे को साथ लेकर भिक्षा मांगने निकलती और जो कुछ मिलता, उसी से दोनों का गुजारा होता था। ब्राह्मणी शिव भक्त थी और प्रदोष व्रत भी करती थी।

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एक दिन जब ब्राह्मणी भिक्षा मांगकर घर लौट रही थी, तब रास्ते में उसे एक युवक घायल अवस्था में पड़ा मिला। ब्राह्मणी उसे अपने साथ घर ले आई और उसका उपचार किया। ठीक होने पर युवक ने बताया कि वह विदर्भ राज्य का राजकुमार है। उसके राज्य पर दुश्मनों ने कब्जा कर लिया है।

युवक की बात सुनकर ब्राह्मणी ने उसे अपने बेटे की तरह ही घर में रहने को कहा। धीरे-धीरे राजकुमार और ब्राह्मण पुत्र अच्छे मित्र बन गए और साथ रहने लगे। एक दिन अंशुमति नाम की एक सुंदर गंधर्व कन्या की नजर राजकुमार पर पड़ी। पहली नजर में ही गंधर्व कन्या राजकुमार पर मोहित हो गई।

अगले ही दिन गंधर्व कन्या राजकुमार को अपने माता-पिता से मिलाने लाई। गंधर्वराज और उनकी पत्नी को भी राजकुमार बहुत पसंद आया। कुछ दिन बाद गंधर्वराज को सपने में शिव ने कहा, ‘इस राजकुमार का विवाह अंशुमति से कर दो। इसका भविष्य बहुत उज्ज्वल है।’

भगवान शिव की आज्ञा मानकर गंधर्वराज ने अपनी पुत्री अंशुमति का विवाह राजकुमार के साथ कर दिया। विवाह के बाद गंधर्वराज ने अपनी सेना की सहायता भी राजकुमार को दी जिससे उसने अपने शत्रुओं से राज्य पुन: प्राप्त कर लिया और राजा बनकर सभी तरह के सुख भोगने लगा।

राजकुमार ने ब्राह्मण पुत्र को राज्य का प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया। इस प्रकार ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत और भगवान शिव की कृपा से राजकुमार और ब्राह्मण-पुत्र दोनों के जीवन में सुख, सम्मान और समृद्धि आई। मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से हर तरह की परेशानी अपने आप ही दूर हो जाती है।

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