बछ बारस 30 अगस्त को, क्यों करते हैं ये व्रत? जानें मंत्र-मुहूर्त और पूजा विधि

Published : Aug 27, 2024, 10:03 AM ISTUpdated : Aug 30, 2024, 08:48 AM IST
Bach-Baras-2024

सार

Bach Baras 2024 Kab hai: हिंदू धर्म में ऐसे अनेक व्रत किए जाते हैं, जिनमें गाय की पूजा की जाती है, बछ बारस भी एक ऐसा ही व्रत है। ये पर्व हर साल भाद्रपद मास में किया जाता है। जानें 2024 में कब है बछ बारस व्रत… 

Bach Baras 2024 Details: पुराणों के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को बछ बारस व्रत किया जाता है। इस दिन गाय और बछड़ों की पूजा करने का विधान है। इसलिए इसे गोवत्स द्वादशी भी कहते हैं। खास बात ये है कि ये व्रत सिर्फ वही महिलाएं करती हैं जिनका पुत्र होता है। ये व्रत पुत्र की लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए किया जाता है। जानें साल 2024 में कब है बछ बारस, पूजा विधि, और शुभ मुहूर्त आदि…

कब है बछ बारस? (Bach Baras 2024 Kab hai)
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि 29 अगस्त, गुरुवार की रात 01 बजकर 37 मिनिट से शुरू होगी, जो अगले दिन यानी 30 अगस्त, शुक्रवार की रात 02 बजकर 25 मिनिट तक रहेगी। यानी द्वादशी तिथि का सूर्योदय 30 अगस्त को होगा, इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा।

बछ बारस 2024 शुभ योग-मुहूर्त (Bach Baras 2024 Shubh Yog-Muhurat)
30 अगस्त, शुक्रवार को पुनवर्सु नक्षत्र होने से सर्वार्थसिद्धि नाम का शुभ योग शाम 05:55 तक रहेगा। इस शुभ योग में किए गए हर काम सफल रहते हैं। बछ बारस के मौके पर सवार्थसिद्धि योग बहुत ही खास रहेगा। ये हैं पूजा के मुहूर्त…
- सुबह 07:46 से 09:19 तक
- दोपहर 12:02 से 12:52 तक
- दोपहर 12:27 से दोपहर 02:01 तक
- शाम 05:08 से 06:42 तक

इस विधि से करें पूजा (Bach Baras Puja Vidhi)
- 30 अगस्त, शुक्रवार की सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। इस दिन गाय के दूध, दही आदि चीजों का उपयोग खाने में न करें।
- बछबारस के व्रत में गेहूं से बनी चीजें और मूंग की दाल खाने की भी मनाही है। इस दिन सब्जी आदि काटना भी निषेध हैं यानी ये काम भी इस दिन नहीं करना चाहिए।
- ऊपर बताए गए किसी शुभ मुहूर्त में गाय (दूध देने वाली) को उसके बछडे़ सहित स्नान करवाएं। नए वस्त्र पहनाएं और फूलों की माला पहनाकर विधि-विधान से पूजा करें।
- पूजा के दौरान मन ही मन कामधेनु का स्मरण करते रहें। इसके बाद बर्तन में चावल, तिल, जल, सुगंधित पदार्थ मिलाकर नीचे लिखा मंत्र बोलते हुए गाय के पैर धोएं…
क्षीरोदार्णवसम्भूते सुरासुरनमस्कृते।
सर्वदेवमये मातर्गृहाणार्घ्य नमो नम:॥
- गाय के पैरों में लगी मिट्टी से अपने मस्तक पर तिलक लगाएं। गाय की आरती करें और बछ बारस की कथा सुनें। मान्यता है कि इस व्रत से पुत्र की आयु लंबी होती है।

गौ माता की आरती (Gau Mata Ki Aarti Lyrics In Hindi)
आरती हरनि विश्वधैया की ।।
अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनी,
अविचल अमल मुक्तिपद्दायिनी ।।
सुर मानव सौभाग्याविधायिनी,
प्यारी पूज्य नन्द छैया की ।।
अखिल विश्व प्रतिपालिनी माता,
मधुर अमिय दुग्धान्न प्रब्दाता ।।
रोग शोक संकट परित्राता,
भवसागर हित दृढ़ नैया की ।।
आयु ओज आरोग्यविकाशिनी,
दुःख दैन्य दारिद्रय विनाशिनी ।।
सुष्मा सौख्य समृद्धि प्रकाशिनी,
विमल विवेक बुद्धि दैया की ।।
सेवक हो चाहे दुखदाई,
सा पय सुधा पियावति माई ।।
शत्रु-मित्र सबको सुखदायी,
स्नेह स्वभाव विश्व जैया की ।।
आरती श्री गैया मैया की
आरती हरनि विश्वधैया की ।।
अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनी,
अविचल अमल मुक्तिपद्दायिनी ।।
सुर मानव सौभाग्याविधायिनी,
प्यारी पूज्य नन्द छैया की ।।
अखिल विश्व प्रतिपालिनी माता,
मधुर अमिय दुग्धान्न प्रब्दाता ।।
रोग शोक संकट परित्राता,
भवसागर हित दृढ़ नैया की ।।
आयु ओज आरोग्यविकाशिनी,
दुःख दैन्य दारिद्रय विनाशिनी ।।
सुष्मा सौख्य समृद्धि प्रकाशिनी,
विमल विवेक बुद्धि दैया की ।।
सेवक हो चाहे दुखदाई,
सा पय सुधा पियावति माई ।।
शत्रु-मित्र सबको सुखदायी,
स्नेह स्वभाव विश्व जैया की।।


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Disclaimer
इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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